फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अवैध कॉलोनियों और निर्माणों को खुली छूट, नोटिस के बाद भी काम जारी

विज्ञापन
शकलापुरी में अवैध कॉलोनी - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
सहारनपुर। विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की छूट के कारण अवैध कॉलोनियों और निर्माणों को फलने फूलने का मौका मिल रहा है। नियमानुसार नोटिस जाने के बाद अवैध कॉलोनियों में प्लॉटिंग और अवैध निर्माण रुक जाने चाहिएं, मगर यहां मामला कुछ और ही है। नोटिस के बाद की कार्यवाही को लंबा खींचे जाने की वजह से कॉलोनाइजर्स को प्लॉट बेचने का मौका मिल जाता है। गंभीर बात यह है कि नोटिस भेजने के बाद प्राधिकरण के अधिकारी शांत बैठ जाते हैं।
विज्ञापन

अवैध कॉलोनियों को नोटिस भेजने के बाद उस पर कार्रवाई होने में विकास प्राधिकरण महीनों का समय लगा देता है। इसकी वजह से कॉलोनाइजर प्लॉट बेचकर निकल जाते हैं, जिसके बाद बचते हैं प्लॉट खरीदने वाले। उदाहरण के तौर पर बीते पांच से दस वर्ष में शकलापुरी मार्ग पर छह से सात कॉलोनी काटी जा चुकी हैं। खास बात यह है कि इनमें से एक भी कॉलोनी वैध नहीं है, जबकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई मात्र दो कॉलोनियों पर की गई है। करीब आठ साल से काटी जा रही कॉलोनी पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तीन वर्ष पहले की गई थी, जिसका खामियाजा कॉलोनी में प्लॉट खरीदकर मकान बनाने वालों ने भुगता, जबकि कॉलोनाइजर आराम से बच निकले। बीते करीब तीन माह से दो अवैध कॉलोनियां अगल-बगल काटी जा रही हैं, जिनको करीब दो माह से नोटिस गया है। नियमानुसार नोटिस के बाद उक्त कॉलोनियों में नए प्लॉट नहीं बेचे जा सकते थे, मगर लगातार प्लॉट बेचे जा रहे हैं। विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कई माह पहले से नोटिस जारी किए हुए हैं। संबंधित अभियंता का कहना है कि उक्त कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण की तैयारी है। यदि कोई व्यक्ति उनमें प्लॉट खरीदता है तो वह भुगतेगा। शकलापुरी मार्ग मात्र एक उदाहरण है। विभागीय सूत्रों के अनुसार दिल्ली रोड पर पैरामाउंट के पास कॉलोनी काटी जा रही है, जिसका नोटिस के बाद कुछ नहीं बिगड़ा है। नवादा रोड पर कई कॉलोनियां काटी जा रही हैं। जनता रोड पर अवैध कॉलोनियों के साथ ही फ्लैट तैयार किए जा रहे हैं, जिनको प्राधिकरण अपने क्षेत्र से बाहर बता रहा है। मल्हीपुर रोड पर रामनगर तक अनेक अवैध कॉलोनियां दस से 15 साल से कट रही हैं। हालांकि विकास प्राधिकरण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कॉलोनियों पर करता रहा है, मगर उसका खामियाजा उन भोले भाले लोगों को भुगतना पड़ता है, जो सस्ते के चक्कर में या अनजाने में अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीद लेते हैं, जबकि कॉलोनाइजर आसानी से बच निकलते हैं।
निर्माणों का भी यही हाल
अवैध कॉलोनियों की तरह निर्माणों का भी यही हाल है। नोटिस के बाद तीन से चार मंजिला इमारतें तैैयार हो जाती हैं, जिसके बाद उन्हें ध्वस्त करना नामुमकिन रहता है। इतना ही नहीं, अनेक मामले सील तोड़कर निर्माण करने के भी सामने आ चुके हैं। 26 जुलाई 2018 को घंटाघर पर एक व्यक्ति ने अवैध निर्माण की सील तोड़कर निर्माण शुरू कराया था। बीते दिनों प्राधिकरण ने लिंक रोड पर नक्शे के विपरीत निर्माण करने पर एक भवन को सील किया था, जिसकी सीढ़ियों की सील हटाकर उक्त भवन में निर्माण जारी रखा गया। ऐसे एक नहीं अनेक मामले रहे हैं।
विज्ञापन

नोटिसों के बाद अवैध कॉलोनियों या निर्माणों को नियमित कराने या फिर कार्रवाई करने का समय निर्धारित है। मगर कई मामलों में निर्माण कराने वालों और कॉलोनी काटने वाले उच्चाधिकारियों के यहां अपील कर समय ले लेते हैं, जिसकी वजह से कार्रवाई लटक जाती है। मगर फिर भी व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। कोशिश यही है कि अवैध कॉलोनियां और निर्माण रुक सकें।
विज्ञापन

डीपी सिंह, कार्यवाहक सचिव, एसडीए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें