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किसी से मनमाना कर तो किसी पर की जा रही मेहरबानी

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सहारनपुर। नगर निगम क्षेत्र में भवनों पर लगे कर में बड़ा घालमेल है। एक ओर जहां कई भवनों पर मनमाना कर लगाया गया है, वहीं कुछ खास भवनों पर मेहरबानी की जा रही है। इनमें महानगर के कई बड़े होटल, बैंक्वेट हॉल, फैक्टरियां तक शामिल हैं। कई भवन ऐसे भी हैं, जो व्यावसायिक हैं, लेकिन उन पर आवासीय कर लगाया गया है। विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि गड़बड़ी है, लेकिन सुधार नहीं कर पा रहे हैं।
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नवादा रोड स्थित एक संपत्ति की एआरवी (एनुअल रिटेल वैल्यू) एक अप्रैल 2015 में 1,62,432 थी। किसी भी संपत्ति या भवन की इसी वैल्यू पर 25 फीसदी कर नगर निगम लगाता है। इसमें 10 फीसदी गृह कर, 12 फीसदी जल कर और तीन फीसदी सीवर कर शामिल होता है, लेकिन नवादा रोड की संपत्ति के स्वामी ने जब गलत कर लगाने की शिकायत की तो उसके बाद नगर निगम ने अपनी पड़ताल कर संपत्ति की एआरवी 49,572 कर दी। यानी पहले तीन गुना अधिक एआरवी की हुई थी। उक्त संपत्ति की असल वैल्यू क्या है यह जांच का विषय है, लेकिन इस प्रकार की शिकायतें नगर निगम में लगातार आती रही हैं। इससे साबित होता है कि संपत्तियों और भवनों पर कर में बड़ी गड़बड़ी है। अंबाला रोड, जीपीओ रोड, कोर्ट रोड, दिल्ली रोड के कई होटल और शॉपिंग कांप्लेक्स कर निर्धारण ठीक नहीं है। चर्चा है कि खास भवन स्वामियों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है। 62 फुटा रोड पर दो बैंक्वेट हॉल से बेहद कम कर वसूला जा रहा है, जबकि धरातल पर उनका क्षेत्रफल काफी अधिक है। इसके अलावा नदीम कॉलोनी में कई फैक्टरियों पर लगाया जा रहा कर भी शक के दायरे में है।
11 साल में भी लाइन पर नहीं आई व्यवस्था
नगर निगम का गठन हुए 11 साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन नगर निगम की कर व्यवस्था अभी तक लाइन पर नहीं आ सकी है। नगर निगम में महानगर के मात्र 1.38 लाख भवन दर्ज हैं, जबकि असल में इनकी संख्या करीब दो लाख है। यानी बड़ी संख्या में ऐसे भवन हैं, जो अभी तक कर के दायरे में नहीं आए हैं।
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यह बात सही है कि कुछ भवनों का कर निर्धारण ठीक नहीं है। इसीलिए शहर के सभी भवनों कर कंपनी के द्वारा पुन: सर्वे चल रहा है। 31 वार्डों का सर्वे पूर्ण हो चुका है। जिन भी भवनों पर गलत कर लगा है उन सभी को एक अप्रैल से नोटिस जारी किए जाएंगे।
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विनय शर्मा, कर अधीक्षक।
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