सहारनपुर। नगर निगम सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने की तैयारी में है। कार्यकारिणी समिति में यह प्रस्ताव पारित किया जा चुका है, जिसके बाद यह बोर्ड में रखा जाएगा। उससे पहले ही सफाई कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। सफाई कर्मचारी नेताओं ने बुधवार को महापौर डॉ. अजय कुमार के साथ उनके कार्यालय में बैठक की। महापौर ने उनकी बातों काे सुना और किसी भी प्रकार का उत्पीड़न न होने देने का आश्वासन दिया। सफाईकर्मियों ने फैसला वापस नहीं लेने पर हड़ताल की चेतावनी दी।
अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोनी आजाद सहित अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने भी महापौर के सामने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि महानगर की सफाई व्यवस्था अच्छी चल रही है। सफाईकर्मियों की मेहनत का ही नतीजा था कि बीते वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण में सहारनपुर नगर निगम देशभर में 16वें स्थान पर रहा था। ऐसे में व्यवस्था को निजी हाथों में दिए जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने महापौर को बताया कि व्यवस्था निजी हाथों में जाने के बाद करीब 78 करोड़ रुपये सालाना खर्च होंगे, जबकि मौजूदा व्यवस्था में वही कार्य 50 करोड़ रुपये में हो रहा है। यह बात समझ से परे है कि नगर निगम अतिरिक्त रुपया खर्च कर व्यवस्था निजी हाथों में देने जा रहा है।
उन्होंने व्यवस्था निजी हाथों में देने की प्रक्रिया को तुरंत बंद करने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि नगर निगम ने सफाई व्यवस्था निजी हाथों में दी तो सभी सफाईकर्मी हड़ताल कर नगर निगम में धरना और प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। मिलने वालों में धीरज आजाद, सोमपाल, विकास चंचल, दीपक बिरला, कंवलदास, बिट्टू, सोनीराज, अभिषेक, कैलाश, सुनील बहोत, करण आदिवाल, रामकुमार आदि शामिल रहे।
महानगर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। सफाईकर्मियों के मन में कुछ शंकाएं थीं, जिनमें से ज्यादातर को बुधवार की बैठक में दूर कर दिया गया है। आगे भी उनके साथ संवाद जारी रहेगा। जो भी नगर निगम और सफाईकर्मियों के हित में होगा ही निर्णय लिया जाएगा।
- डॉ. अजय कुमार, महापौर