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फसल अवशेष जलाया तो नहीं मिलेगा कृषि योजनाओं का लाभ

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- जनपद में अब तक फसल अवशेष जलाने की दर्ज की गईं 12 घटनाएं
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- प्रति घटना लगाया गया 2500 रुपये जुर्माना
संवाद न्यूूज एजेंसी
सहारनपुर। पराली और गन्ने की पत्तियों को जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। फसल अवशेष जलाने पर अब न सिर्फ जुर्माना लगेगा बल्कि संबंधित किसानों को कृषि विभाग की अनुदान वाली विभिन्न योजनाओं के लाभ से भी वंचित रखा जाएगा।
फसल अवशेष को जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कृषि विभाग सख्त हो गया है। धान और गन्ने की फसल को काटने के बाद किसान आमतौर पर पराली एवं गन्ने की पत्तियों को जलाकर खेत को रबी की फसलों की बोवाई के लिए तैयार करते हैं। कृषि विभाग फसल अवशेष को जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक करने से लेकर जुर्माने तक की कार्रवाई कर रहा है। इसमें पहली बार फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। नए निर्देश के अनुसार तीन बार फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में संलिप्त पाए जाने वाले किसान को कृषि विभाग की ओर से संचालित विभिन्न सरकारी अनुदान की योजनाओं के लाभ से वंचित किया जाएगा। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जनपद में अब तक फसल अवशेष जलाने की 12 घटनाएं दर्ज हुई हैं। इस सभी घटनाओं में 2500 रुपये प्रति घटना की दर से संबंधित पर जुर्माना लगाया गया है।
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फसल अवशेष जलाना भूमि के लिए नुकसानदायक
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा का कहना है कि पराली और गन्ने की पत्तियों को जलाना मृदा स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इससे मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। इसलिए किसानों को फसल अवशेष जलाने की बजाए उसे कृषि यंत्रों की सहायता से मिट्टी में मिला देना चाहिए। इससे मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा में इजाफा होगा। जिससे भूमि का स्वास्थ्य सुधरेगा।
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-- वर्जन --
फसल अवशेष को जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। फसल अवशेष जलाने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। जिले में अब तक 12 घटनाओं में करीब 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। ऐसे किसानों को कृषि विभाग की ओर से संचालित विभिन्न अनुदान वाली योजनों के लाभ से भी वंचित रखा जाएगा। -- डॉ. राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि।
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