सहारनपुर। ‘झूठ को झूठ ही कहूंगा मैं, मुझमें कोई फकीर जिंदा है’ कवि अमित अहद ने अपनी इन पंक्तियों से श्रोताओं को तालियां बजाने को मजबूर कर दिया। विभावरी सांस्कृतिक समिति की ओर से श्री वेद मंदिर में अदाखी वत्स के जन्म दिवस पर वासंतिक काव्य गोष्ठी एवं सारस्वत सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
राजेंद्र राजन ने ‘शोहरतें बुलंदी से इस तरह बिछड़ती हैं, बारिशों की बूंदे ज्यों सीढ़ियां उतरती हैं’ पढ़ा। देहरादून से आए पवन शर्मा ने ‘काम कर तू खास लेकिन आम बनकर जी, हर हृदय में प्यार का पैगाम बनकर जी’ सुनाकर तालियां बटोरीं। जगपाल आर्य ने ‘वो बचपन की मता वो बचपन का प्यार, नहीं मांगने से भी मिलता उधार’ सुनाकर जीवन की हकीकत बयां की। डॉक्टर विजेंद्रपाल शर्मा ने ‘सौ सौ फागुन आए, सबके जीवन में, मन भावन रंग लाए’ सुनाकर वाहवाही लूटी। डॉक्टर आरपी सारस्वत ने ‘धीरे धीरे हो रहा है जड़ता का अंत, अब सरसों के खेत में कविता पढ़े वसंत’ रचना सुनाई। नरेंद्र मस्ताना ने ‘अहंकार का भाव कभी जब आने लगता है, तब जुगनू सूरज को आंख दिखाने लगता है सुनाया। योगेद्रपाल दत्त ने हरा समंदर गोपीचंदर, बोल मेरी मछली कितना पानी सुनाकर वाहवाही लूटी। जेके तायल, राजेश गोयल, संदीप शर्मा, बालेश्वर जैन, बिलाल सहारनपुरी ने भी कविताएं पढ़ी। कार्यक्रम में देहरादून से आए शिक्षाविद् डॉक्टर रामविनय सिंह को साहित्य गौरव सम्मान दिया गया इस मौके पर जेके अग्रवाल, अनिल मलिक, बृजेश शर्मा, विनीत राय जैन, आदेश कुमार शर्मा, अनिता गोयल, शिवकुमार शर्मा, राजकुमार सैनी, जेपी यादव, रामनाथ, नाथीराम, अनिल शर्मा आदि मौजूद रहे।