सहारनपुर। न्यायालय अपर जिला न्यायाधीश त्वरित न्यायालय प्रथम श्रेय शुक्ला ने हत्या के दोषी पति आशीष को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले में सास रामो उर्फ सुनीता, ससुर नरेश, जेठानी बबीता और जेठ सिकंदर को दोषमुक्त किया गया है।
वादी संजय ने थाना गंगोह में तहरीर देकर बताया था कि उनकी बेटी पिंकी की शादी आशीष निवासी मखदूमजहां कस्बा थाना गंगोह के साथ हुई थी। शादी में पूरे पांच लाख रुपये का दहेज आदि सामान दिया था। इसके बाद विपक्षी आशीष व उसके परिवार वाले कम दहेज लाने के कारण ताने देकर मानसिक व शारीरिक शोषण कर रहे थे। बेटी के ससुराल वाले उसे दो लाख रुपये और लाने का दबाव बना रहे थे। आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने बेटी को घर से बाहर निकाल दिया। उस समय बेटी चार माह की गर्भवती थी। 27 मई 2018 को दोपहर दो बजे विपक्षीगण घर पहुंचे और जिम्मेदार लोगों के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि बेटी को सुसराल भेज दो। इसके बाद उन्होंने बेटी को घर भेज दिया।
28 मई 2018 को सुबह आठ बजे विपक्षीगण के पड़ोसी लोगों ने फोन कर सूचना दी कि बेटी को दहेज कम लाने के कारण गला चाकू से रेत कर हत्या कर दी है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आशीष, रामो उर्फ सुनीता पत्नी नरेश, बबीता पत्नी सिकंदर निवासीगण मोहल्ला मखदमूजहां गंगोह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के बाद मामले को अदालत में दाखिल किया। अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद पति आशीष को सजा सुनाई है। अदालत ने रामो उर्फ सुशीला पत्नी नरेश, बबीता पत्नी सिकंदर को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया है।
- पत्नी की हत्या के बाद खुद भी की थी जान देने की कोशिश
सहायक शासकीय अधिवक्ता सतीश सैनी ने मामले में पैरवी की। बताया कि जिस कमरे में मृतका का शव मिला। वह भी अंदर से बंद था। साथ ही मुख्य गेट का दरवाजा भी अंदर से बंद था। दोषी पति ने पत्नी पिंकी की गला रेतकर हत्या करने के बाद खुद भी आत्महत्या करने की कोशिश की। पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला। ऐसे में किसी अन्य द्वारा घटना को अंजाम नहीं दिया जा सकता। अदालत ने मामले को दहेज हत्या का न मानते हुए हत्या के मामले में दोषी को सजा सुनाई है।