फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘कब तक दम तोडेंगी जिंदगियां, अब तो बचा लो’

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। शहर का वीआईपी मार्ग कहा जाने वाला सर्किट हाउस रोड अब डेथ जोन बन चुका है। मंगलवार रात हुए हृदय विदारक हादसे में दो छात्रों की मौत के साथ ही तीन माह में छह लोगों की मौत हो चुकी है। यहां लगातार हादसों के कारण क्षेत्रवासियों के साथ ही शहर के अन्य लोगों में आक्रोश है। बुधवार को अमर उजाला ने दिल्ली रोड से शुगर मिल क्षेत्र की ओर जाने वाले इस मार्ग पर रहने वाले और व्यापार करने वाले लोगों से जाना कि आखिर इन हालात की वजह क्या है। इसमें सबसे ज्यादा रोष इसी बात को लेकर रहा कि कहने को तो यह जोन टू लेन वाला है। मगर यहां एक ही मार्ग पर दोनों ओर से वाहन आते जाते है। दो चौकियों और एक चेकिंग प्वाइंट होने के बावजूद यातायात व्यवस्था के नियंत्रण में की जा रही लापरवाही हादसों के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। लोग बोले कि हादसों में यूं ही जिंदगियां कब तक दम तोड़ेंगी। अब तो हमें बचाया जाए।
विज्ञापन

पापा की मौत को कभी नहीं भूल सकता
सर्किट हाउस रोड पर एमपीएस इंटर कालेज के पास रहने वाले भूसा कारोबारी अमित त्यागी कहते हैं कि इसी साल सात सितंबर के दिन को वे भूल नहीं सकते। म्हाड़ी का मेला शुरू हुआ था। बहनें घर पर आई थीं। इसी रात मनहूस खबर मिली कि उनके नजदीक ही बाइक पर आ रहे पापा घनश्याम त्यागी को एक ट्रक ने चपेट में ले लिया। जब तक कुछ जान पाते तब तक पापा उनका साथ छोड़ चुके थे। मेरी नजर में पहले तो रोड का डिजाइन करने वाले और फिर पुलिस व्यवस्था जिम्मेेदार है।
दुकान में ही घुस गया था ट्रक, मुश्किल में बची थी जान
सर्किट हाउस पर ही डेयरी का काम करने वाले विकास कुमार कहते हैं कि उनकी दुकान पर रात तक बड़ी संख्या में लोग आते हैं। बच्चे भी दूध दही लेने पहुंचते हैं। उनके बराबर से तेज रफ्तार और मनमाने ढंग से भारी वाहन गुजर जाते हैं। कोई कंट्रोल करने वाला नहीं होता। कुछ माह पहले ही तेज रफ्तार ट्रक उनकी दुकान में घुस गया था। इसका एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। वह वहां नहीं थे अन्यथा जान खतरे में पड़ गई थी। कम से कम रात के समय तो वाहनों को दोनों ओर से चलाया जाना चाहिए। तभी हादसे कम हो सकते हैं।
विज्ञापन

खतरनाक कट और स्पीड ब्रेकर न होना भी वजह
इसी रोड पर प्लाइवुड की दुकान के स्वामी मयंक का कहना है कि हर सात दिन में कोई न कोई हादसा यहां होता है। इससे हर समय डर लगा रहता है। उनकी दुकान भी रोड से ही सटी है। उनका कहना है कि कई जगहों पर मनमाने कट और कालोनियों की ओर जाने वाले रास्तों पर स्पीड ब्रेकर न होना भी बड़ी वजह है। इसकी सही व्यवस्था की जाए।
किस काम की चौकी, किस काम के ये प्वाइंट्स
मंगलवार को हुए हादसे के समय मौजूद रहे व्यापारी जनक राज का कहना है कि वीआईपी रोड पर दो चौकियां और चेकिंग प्वाइंट्स होने का क्या फायदा है। रात में दस बजे के बाद तो तेज रफ्तार और मनमाने ढंग से दौड़ने वाले वाहनों पर नजर रखने वाला कोई नजर ही नहीं आता। यदि शुगर मिल, सर्किट हाउस और हसनपुर चुंगी पर ही एक-एक सिपाही ट्रैफिक कंट्रोल करे तो बहुत हादसे रोके जा सकते हैं। लेकिन पुलिस को अवैध वसूूली कर नो एंट्री में वाहनों को प्रवेश कराने की आदत छोड़नी होगी।
रोडवेज बसों को चलवाया, वे भी सीधी नहीं जा पातीं
क्षेत्र में मिले कुछ अन्य लोगों ने यह भी बताया कि प्रयोग के तौर पर रोडवेज बसों को छोटे मार्ग से निकाला जाता रहा है। मगर, ये बसें भी बीच में मोड़नी पड़ती हैं। सीधी नहीं जा पाती हैं। इसकी वजह रास्ता कई जगहों पर संकरा होना और बीच में कालोनियों का अतिक्रमण भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें