सहारनपुर। मुकीम काला और उसके गुरु मुस्तफा उर्फ कग्गा की दहशत का आलम यह रहा है कि वारदात होने के बाद मुकदमे में गवाह तक खौफ में रहे। ऐसा ही बेहट कोतवाली क्षेत्र में सिपाही बलबीर सिंह की हत्या के मामले में भी हुआ। उस वारदात में होमगार्ड घायल हुआ था, जो मुख्य गवाह भी था, लेकिन वह गवाही नहीं दे पाया। पुलिस अधिकारियों ने इसकी गवाही कराने का काफी प्रयास तक किया, लेकिन हर बार कोई न कोई बहाना बना लेता था।
यह वारदात वर्ष 2011 में हुई थी। बेहट कोतवाली क्षेत्र में रेत खनन रॉयल्टी का कैश लूटने के लिए मुस्तफा उर्फ कग्गा ने गैंग के सदस्य मुकीम काला और अन्य लोगों को साथ लेकर धावा बोला था। तब पिकेट पर तैनात पुलिसकर्मियों पर गोलियां बरसा दी थीं, जिसमें सिपाही बलबीर सिंह की मौत हो गई थी, जबकि एक होमगार्ड घायल हुआ था। समय रहते उपचार मिलने पर होमगार्ड ठीक हो गया था। मुकदमे में इस होमगार्ड के अलावा भी कई लोग गवाह रहे। चूंकि होमगार्ड इस घटना का प्रत्यक्षदर्शी था और मुख्य गवाह था, इसलिए उसकी गवाही होनी बेहद जरूरी थी। बावजूद इसके होमगार्ड इस मामले में अपनी गवाही नहीं करा सका। पुलिस सूत्रों की मानें तो अधिकारियों की तरफ से भी कई बार प्रयास किया गया कि होमगार्ड की गवाही कराई जाए, लेकिन गवाही हो नहीं पाई है। यही वजह है कि सिपाही बलबीर सिंह की हत्या जैसे संगीन अपराध को अंजाम देने वालों को अब तक सजा नहीं हो सकी है।
अब गैंग का सरगना मुकीम काला मारा जा चुका है तो माना जा रहा है कि होमगार्ड की गवाही हो जाएगी, जिसके बाद आरोपियों को सजा हो सकेगी।