सहारनपुर। जनपद में मेल सेक्स वर्करों (एमएसडब्ल्यू) की सक्रियता बढ़ रही है। बीते करीब छह माह में 50 से अधिक मेल सेक्स वर्करों में एचआईवी की पुष्टि हुई है, इनमें शहरी क्षेत्र के अधिक मेल सेक्स वर्कर शामिल हैं। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि यदि यह लोग कितने लोगों को संक्रम ित कर चुके होंगे।
एसबीडी जिला अस्पताल स्थित एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी) सेंटर 2013 से काम कर रहा है। बीते करीब आठ साल में सैकड़ों लोगों में एचआईवी और एड्स की पुष्टि हुई है। वर्तमान में जिले भर में करीब 2300 लोग पंजीकृत हैं, इनमें से करीब 2150 लोगों का इलाज सेंटर से किया जा रहा है। खास बात यह है कि एचआईवी जांच के लिए मेल सेक्स वर्कर भी पहुंच रहे हैं। ज्यादातर सेक्स वर्कर चिकित्सक की सलाह के बाद जांच कराने पहुंचे हैं। उन्हें लंबे समय से हल्के बुखार और अन्य शिकायतें हैं। खास बात यह है कि बीते छह से आठ माह में 50 से अधिक मेल सेक्स वर्करों में एचआईवी की पुष्टि हुई है, जो हैरान करने वाला है। साथ ही चिंता की बात यह है कि 50 मेल सेक्स वर्करों ने कितने लोगों को संक्रमित किया होगा।
एआरटी में सुविधाएं
एसबीडी जिला अस्पताल में स्थापित एआरटी सेंटर में एचआईवी की सभी जांचें पूरी तरह फ्री हैं। मरीजों के लिए ब्लड की 24 घंटे उपलब्धता है, जो फ्री मिलता है। एचआईवी पॉजीटिव मिलने वाले मरीजों को इलाज के साथ ही काउंसिलिंग कर उसमें आत्मविश्वास लाया जाता है, ताकि वह नकारात्मकता की ओर ना चला जाए। साथ ही दवाएं भी दी जाती हैं।
साल दर साल बढ़ रहे मरीज
वर्ष-------------मरीजों की संख्या
2015-------------180
2016-------------244
2017-------------308
2018-------------356
2019-------------346
2020-------------233
एचआईवी के कारण
एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति की सुई लगाने से।
एचआईवी संक्रमित मरीज का खून स्वस्थ व्यक्ति को चढ़ाने से।
संक्रमित महिला से पैदा होने वाले बच्चे को।
संक्रमित महिला या पुरुष के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से।
एचआईवी के लक्षण
एचआईवी का पहला लक्षण दो से छह हफ्तों में दिखाई देने लगता है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम बिगड़ने लगता है। वायरल फ्लू की ही तरह लक्षण जैसे सिर दर्द, डायरिया, थकान, गले का सूखना, मांसपेशियों में दर्द, सूजन, छाती पर लाल रैशेज और बुखार महसूस होता है। दूसरी स्टेज में वायरल जैसे लक्षण नहीं दिखाई देते और न ही उन्हें कोई बीमारी महसूस होती है। ऐसी अवस्था में हर वक्त थकान, गले के आसपास सूजन, 10 दिन से ज्यादा बुखार, रात में पसीना आना होता है। एचआईवी की एडवांस और आखिरी स्टेज को एड्स कहते हैं। शरीर में मौजूद सीडी-4 टी सेल्स का टेस्ट कराने पर जब सीडी-4टी सेल्स की संख्या 200 से भी कम होती है तो एड्स की अवस्था होती है। सामान्य व्यक्ति में सीडी-4 सेल्स की संख्या 500 से 1600 के बीच होती है।
जनपद के एचआईवी मरीजों में मेल सेक्स वर्कर भी शामिल हैं। लोगों से अपील है कि वह किसी भी तरह से अपनी जिंदगी से खिलवाड़ न करें और यदि किन्हीं भी कारणों से संक्रमित हो जाते हैं तो घबराएं नहीं, बल्कि नियमित रूप से इलाज कराएं। एआरटी सेंटर में जांच और दवाएं सब फ्री उपलब्ध हैं। - डॉ. केवी सिंह, नोडल अधिकारी।