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यहां भी रामभरोसे मरीजों की जिंदगी

Sun, 13 Aug 2017 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन न मिलने से कई जिंदगियों ने दम तोड़ दिया। बेशक आक्सीजन को लेकर सहारनपुर जिला अस्पताल में ऐसी स्थिति नहीं है, लेकिन अव्यवस्थाएं यहां भी हावी हैं। गंभीर मरीजों  को बेहतर उपचार की जगह हायर सेंटर रेफर करने की पर्ची  थमा दी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में मरीज चंडीगढ़, मेरठ या देहरादून ले जाते वक्त रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
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सहारनपुर मंडल मुख्यालय है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की उम्मीद की जाती है। मगर जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं की स्थिति आज भी वही है, जो बरसों पहले थी। यहां ढंग का इलाज तो दूर जिला अस्पताल में 50 फीसदी से भी कम चिकित्सकीय स्टाफ है। आलम यह है कि कई चिकित्सक ओपीडी में घंटों ड्यूटी करने के बाद इमरजेंसी में भी सेवा देते हैं। शायद इसीलिए इमरजेंसी में सामान्य मरीजों को लिया जाता है।

जरा सा भी गंभीर मरीज आए तो उसे सीधे रेफर कर दिया जाता है। परिजन मरीज को लेकर देहरादून, चंडीगढ़ या मेरठ ले जाते हैं, लेकिन 20 फीसदी मामलों में मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं, जिसके लिए पूरा सिस्टम जिम्मेदार है।  
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बता दें जिला अस्पताल में करीब 20 साल पहले महिला अस्पताल में क्लोरीन के सिलेंडर आए थे। क्लोरीन का इस्तेमाल पानी को शुद्ध करने में किया जाता है। यह सिलेंडर अस्पताल प्रशासन की अनदेखी के कारण ऐसे ही रखे रहे, जिन पर पानी लगता गया और वह जंग पकड़ते गए। वर्ष 2015 में सिलेंडर लीक हुए, जिनसे गैस का रिसाव हुआ। गैस की दुर्गंध से करीब तीन गायों की जान चली गई थी। मरीजों की जान बचाने के लिए तीमारदार खुले में लेकर भागे थे। हालांकि घटना के बाद क्लोरीन के सिलेंडर अस्पताल से हटा दिए गए।  


इन दिनों मलेरिया और पेट के रोगों का मौसम चल रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 150 मरीजों में मलेरिया और पेट के रोगों की पुष्टि हो रही है, जिनमें से गंभीर रोगियों को भर्ती किया जा रहा है। आलम यह है कि एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों को लेटाकर इलाज किया जा रहा है। कई बार मरीजों को बरामदे में फर्श पर लेटाकर इलाज किया जाता है।  

इलाज से ज्यादा स्टैंड की पर्ची का शुल्क
जिला अस्पताल में एक रुपये की पर्ची पर मरीजों का इलाज होता है। मगर दुपहिया वाहन खड़ा करने के लिए दस रुपये खर्च करने होते हैं। जी हां, जिला अस्पताल में में पार्किंग की व्यवस्था है, जिसका बाकायदा ठेका छोड़ा जाता है। प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोग जिला अस्पताल पहुंचते हैं, जिनसे दुपहिया वाहन को पार्किंग में खड़ा करने के नाम पर दस रुपये वसूले जाते हैं।  

ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में होने का दावा
सीएमएस डॉ. सत्य सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। अंबाला रोड स्थित एक फर्म को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का ठेका दिया गया है। जिला अस्पताल में 80 सिलेंडर 24 घंटे स्टॉक में रहते हैं। 15 से 20 सिलेंडर प्रतिदिन खर्च होते हैं, जिनको प्रतिदिन रिफिल कराया जाता है। बाकी व्यवस्थाएं भी अन्य जिलों से बेहतर हैं। 
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