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इफ्तार पार्टी पर खर्च होने वाले पैसे से गरीबों की करें मदद

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सहारनपुर। रोजेदारों ने हेल्पलाइन में अनेक सवाल किए। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम मौलाना कारी इसहाक गोरा ने इन सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस बार कोरोना लॉकडाउन की वजह से जरूरतमंदों की तादाद बढ़ी है। अपने आस पास ऐसे जरूरतमंदों पर निगाह रखें। उनकी हर तरह से मदद करें। जकात के साथ फितरा भी अभी निकालकर जरूरतमंदों तक पहुंचा दें। हर वर्ष इफ्तार पार्टियां करने वाले भी, उस पैसे का उपयोग गरीबों की मदद के लिए करें।
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हेल्पलाइन पर आए सवाल और उनके जवाब
सवाल- बेहट निवासी शहजाद ने पूछा कि लोग यह कहते हैं कि कोरोना से बचने के लिए थोड़े-थोड़े समय के बाद पानी पीते रहना चाहिए ताकि हलक खुश्क ना हो तो ऐसी सूरत में रोजा कैसे रखा जाएगा?
जवाब- अगर डाक्टर बकायदा इस बात को आपसे कहें कि आप कोरोना से बचने के लिए हर घंटे पानी पीजिए क्योंकि आपको कोरोना होने का डर है तो रोजा मत रखिये। बाद में कजा अदा करें।
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सवाल- देवबंद निवासी फ़ैसल सिद्दीकी ने पूछा कि क्या बिना किसी तकलीफ के तरावीह की नमाज बैठकर पढ़ सकते हैं?
जवाब : तंदुरुस्त को नमाज खड़े होकर ही पढ़नी चाहिए। बैठकर पढ़ने पर कम सवाब मिलेगा।
सवाल- फिरोजाबाद निवासी डाक्टर जमील ने पूछा कि अगर किसी बीमार को ग्लूकोज लगाने की जरुरत हो तो क्या लगाया जा सकता है, इससे रोजा तो नहीं जाता है?
जवाब- जी हां, शरीयत के अनुसार रोजे की हालत में ग्लूकोज चढ़वाया जा सकता है इससे रोजा नहीं टूटता है।
सवाल- अगर किसी ने सहरी खाया और सूर्योदय के बाद डकारें आईं हों और साथ में पानी आ जाता हो तो रोजे में कुछ खलल तो नहीं पडे़गी।
जवाब:- डकार के बाद में पानी आ जाने से रोजे में कुछ हर्ज नहीं होता लेकिन खाने पीने विषेशकर सहरी, इफ्तारी आदि में एहतियात रखनी चाहिए।
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