सहारनपुर। किशोर विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ ही स्वस्थ बनाने का भी जिम्मा अब गुरुजी का होगा। माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को पहली बार यह जिम्मेदारी दी गई है। क्लास टीचर्स को अपनी कक्षा के एक-एक विद्यार्थी के स्वास्थ्य रिकार्ड लिखित में तैयार करना होगा।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किशोरवय छात्र-छात्राओं को विभिन्न तरह की गोलियां दी जाती हैं, जिनमें आयरन और अलबेंडाजोल आदि शामिल हैं। अभी तक साल में एक या दो बार स्कूलों में ये गोलियां उपलब्ध करा दी जाती थी और किशोरों को गोलियां खिला दी जाती थी। मगर अब क्लास टीचर्स को बाकायदा प्रत्येक विद्यार्थी का रिकार्ड अपडेट करना होगा। इसके लिए हर शिक्षक को रजिस्टर मुहैया कराया गया है, जिसमें उसे अपनी क्लास के प्रत्येक विद्यार्थी की हर माह की रिपोर्ट दर्ज करनी होगी। गोलियां देने के बाद यदि कोई साइडइफेक्ट या कोई अन्य परेशानी किसी छात्र को होती है तो वह भी अंकित करना होगा। किस माह में कितने विद्यार्थियों को गोलियां खिलाई गईं यह भी दर्ज करना होगा। रजिस्टर में काफी चीजें संबंधित आंगनबाड़ियों की ओर से भरी जाएंगी। प्रत्येक विद्यालय में नोडल अधिकारी
व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रत्येक विद्यालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो कोई भी सीनियर शिक्षक हो सकता है। यह नोडल अधिकारी समय-समय पर रजिस्टर आदि की जांच करेगा। यदि किसी कक्षा का रजिस्टर अपडेट नहीं है या कोई अन्य समस्या बन रही है तो नोडल अधिकारी की जवाबदेही होगी।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक क्लास का अलग रजिस्टर तैयार करना होगा। हर क्लास की जिम्मेदारी संबंधित क्लास टीचर की होगी। उसे प्रत्येक माह का ब्योरा रजिस्टर में अपडेट रखना होगा। चूंकि यह राष्ट्रीय कार्यक्रम है, ऐसे में शिक्षकों को गंभीरता के साथ इसमें सहयोग करना चाहिए।
डॉक्टर अरुण कुमार दूबे, जिला विद्यालय निरीक्षक।