सहारनपुर। उप्र सरकार तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को छह हजार रुपये सालाना आर्थिक सहायता दिलाने की तैयारी कर रही है। इसमें एफआईआर दर्ज कराने वाली या परिवार न्यायालय में विचाराधीन मामलों वाली पीड़ित महिलाओं को शामिल किया जाना है। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि सभी पीड़ितों का सर्वे कराया जाए। इसके बाद राहत दी जानी चाहिए। जिले में इस साल ही अब तक तीन तलाक से जुड़े 100 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इनमें कुछ में एफआईआर दर्ज हुई है तो कुछ मामले विवेचना में हैं।
कानून बनने से पहले भी तो बहुत पीड़ित थीं
गागलहेड़ी क्षेत्र की निवासी तीन तलाक पीड़िता खुर्शीदा कहती हैं कि बड़े संघर्ष के बाद तीन तलाक कानून तो बन गया। मगर अब तक न तो कोई सरकारी मदद मिली और न ही किसी आवास योजना के तहत आशियाना। बहुत सी पीड़िता ऐसी हैं जो अब भी परिवार, समाज या अन्य दबाव में एफआईआर दर्ज नहीं करा पाई। इसलिए सबसे शपथपत्र भरवाकर सर्वे कराया जाए। तभी सही पात्रों तक लाभ पहुंचेगा।
दावे तो कई बार हुए, मदद अब तक नहीं मिली
तीन तलाक पीड़िता राबिया कहती हैं कि तीन साल से ऐसी महिलाओं के नाम पर बड़े दावे और राजनीति की जा रही है, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली है। महज 500 रुपये प्रतिमाह की राशि यदि मिलती भी है तो भी इससे बड़ी राहत नहीं मिलेगी। सरकारी योजनाओं के लाभ सहित अतिरिक्त सहायता दी जानी चाहिए।
सरकारी लाभ को शर्तों में सीमित न करें
तीन तलाक की पीड़िता फरहीन कहती हैं जब कानून बना था, तब लगा था कि उनके संघर्ष का बेहतर परिणाम मिला है, लेकिन अभी सरकारी मदद का इंतजार है। घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन मिला कुछ नहीं।
3000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन दी जाए
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज कहती हैं कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई अन्य मंत्रियों के समक्ष यह मांग रख चुकी हैं कि ऐसी पीड़ित महिलाओं को कम से कम 3000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाए। सरकारी योजना के तहत आवास और गुजारा भत्ते की सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ दावे ही न करे बल्कि संजीदगी से राहत दिलाए।
- तीन तलाक कानून के ये हैं प्रमुख प्रावधान
- एक बार में तीन तलाक बोलकर संबंध तोड़ना गैरकानूनी
- यह संज्ञेय अपराध है, यानी पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है
- खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार
- पड़ोसी या अनजान शख्स नहीं दर्ज करा सकता है केस
- आरोपी पति को तीन साल तक की सजा का प्रावधान
- पीड़ित महिला का पक्ष सुनने के बाद ही आरोपी पति की जमानत संभव
- पीड़ित के अनुरोध पर मजिस्ट्रेट दे सकते हैं समझौते की अनुमति
खुर्शीदा- फोटो : SAHARANPUR
फरहीन- फोटो : SAHARANPUR
एडवोकेट फरहा फैज- फोटो : SAHARANPUR