नकुड़ में कथा का रसपान कराती संत सुदीक्षा देवी।
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नकुड़ (सहारनपुर)। संत सुदीक्षा देवी ने कहा कि हमें बच्चों के लिए वसीयत नहीं, बल्कि संतों के दिए वचनों की नसीहत छोड़कर सांसारिक जीवन से विदा होना चाहिए। जिससे सफल जीवन का मार्ग प्रशस्त होगा।
नगर में सरस्वती सत्संग सभा ट्रस्ट के सौजन्य से चल रहे महाशिवरात्रि महोत्सव के तहत आयोजित कथा के दूसरे दिन राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित देवी सुदीक्षा ने कथा का अमृतपान कराते हुए कहा कि हमें सत्कर्मों से जीवन यापन करते हुए प्रभु की भक्ति में समय लगाकर किए गए कार्यों का अनुसरण करते रहना चाहिए कि हम कहां सही और कहां गलत कार्य कर रहे हैं। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक पापी व्यक्ति जिसने जीवन भर सिर्फ और सिर्फ गलत कार्य ही किए, लेकिन अंत समय में भोलेनाथ जी को एक माला भेंट करने से उसको इंद्रलोक में राजा की उपाधि मिली, तो हमें कभी भी यह नहीं सोचना चाहिए कि हम गलत कार्य कर रहे हैं तो गलत ही करते जाए। उन कार्यों को यदि मन क्रम वचन से त्याग कर सही मार्ग पर चला जाए तो प्रभु निश्चित ही माफ कर देते हैं। उन्होंने दान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज बड़े बुजुर्ग समाज में वसीयत छोड़कर जाते हैं, जबकि हमें औलाद के लिए वो नसीहत छोड़कर जानी चाहिए जो हम संतों की कृपा से अपने जीवन में मिलती है। उन्होंने नई पीढ़ी के नौजवानों व विशेषकर लड़कियों से अपनी संस्कृति के अनुसार घरों में रीति रिवाज से ही धार्मिक अनुष्ठान करने का भी आह्वान किया। इस मौके पर महेश सैनी, पुरुषोत्तम अरोड़ा, हंसराज भगत, सुरेन्द्र चौहान, लच्छी धीमान, कृष्णा देवी, राजकुमार, सन्नी मन्नी अरोड़ा, मोहन लाल, गगन चुग, मनोज धनगर, पंडित प्रेम प्रकाश, अनीता, सुमन, सरोज, बबली, सिमरन, कुसुम आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
कथा मे मौजूद श्रद्धालु।- फोटो : SAHARANPUR