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सुबह से हो रही शाम... करते हैं अंतिम संस्कार

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सहारनपुर। किसी की संक्रमण से मौत हुई तो कोई अन्य बीमारी या सामान्य मौत। सुबह से शाम तक शव पहुंच रहे हैं। इन शवों का अंतिम संस्कार कराने में लगे श्मशान घाट के कर्मी किसी कोरोना योद्धा से कम नहीं हैं।
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सहारनपुर में चार प्रमुख श्मशान घाट हैं, जिनमें अंबाला रोड पर श्री शिवपुरी श्मशान घाट पर कोरोना से मरने वालों के सबसे ज्यादा अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। प्रबंध समिति के प्रधान राजन अग्रवाल बताते हैं कि श्मशान घाट की तरफ से दो एंबुलेंस भी संचालित हैं, जिन पर कार्यरत कर्मी शवों को लाने का भी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 23 मार्च के बाद से श्मशान घाट पर शवों के पहुंचने का आंकड़ा लगातार बढ़ा। प्रतिदिन 15 से 20 के बीच शवों का अंतिम संस्कार इस श्मशान घाट पर हो रहा है। अंतिम संस्कार के लिए शवों को लाने वालों में रीलेश गुप्ता, राजू यादव और सुमित की ड्यूटी लगी है। श्मशान घाट पर सोनू और भूपेंद्र शवों का अंतिम संस्कार कराते हैं। इसी तरह हकीकतनगर, नुमाइश कैंप और बाबा लालदास बाड़ा के पास श्मशान घाट पर भी रोजाना करीब 10 अंतिम संस्कार हो रहे हैं।
पहले महीने भर में होते थे 70 से 80 अंतिम संस्कार
अंबाला रोड स्थित श्मशान घाट पर पूर्व में प्रतिमाह 70 से 80 अंतिम संस्कार होते थे। गत 17 मार्च को यहां 10 अंतिम संस्कार हुए थे। उसके बाद 21 मार्च तक कोरोना से मरने वाले चार लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। फिर 22 अप्रैल के बाद यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा और 25 अप्रैल आते आते प्रतिदिन 15 से ज्यादा अंतिम संस्कार होने लगे। 25 अप्रैल को कोरोना संक्रमित पांच और 10 अन्य कारण से मरने वालों का अंतिम संस्कार हुआ तो 26 को कोरोना से 10 और अन्य कारण वालों 09, 27 अप्रैल को कोरोना वाले 10 व अन्य कारण वाले 10 और 28 अप्रैल को कोरोना वाले छह और अन्य 13 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। बृहस्पतिवार को भी दोपहर तक कोरोना से मरने वाले सात शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
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लकड़ी भी हो गई महंगी
एक शव का अंतिम संस्कार करने में करीब साढ़े तीन क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल हो रहा है। प्रतिदिन 15 से अधिक संस्कार होने पर 50 क्विंटल से ज्यादा लकड़ी प्रतिदिन लग रही है। ऐसे में लकड़ी का दाम भी बढ़ गया है। श्मशान घाट के प्रधान राजन अग्रवाल का कहना है कि अब लकड़ी 600 रुपये क्विंटल मिल रही है, जबकि पहले इसका दाम 300 से 350 रुपये था।
कब्रिस्तान में भी बढ़ी संख्या
शहर के अंबाला रोड पर दबनी वाले कब्रिस्तान में शव सुपुर्द ए खाक किए जा रहे हैं, यहां भी संख्या पहले के मुकाबले बढ़ गई है। इस कब्रिस्तान की देखरेख करने वाले मोहम्मद अयाज का कहना है कि अब रोजाना सात से आठ शव सुपुर्द ए खाक के लिए पहुंच रहे हैं। मरने वालों में अधिकांश 60 से ज्यादा के उम्र वाले हैं।
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