सहारनपुर। कहने को नगर निगम के गैराज में विभिन्न प्रकार के 326 वाहन हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से अनेक वाहन गायब हैं, जिनकी कीमत लाखों रुपये में है। जानकर हैरानी होगी कि पांच साल से तीन वाहन एक निजी वर्कशॉप में खड़े हैं, जिनका अधिकारियों को पता तक नहीं है। यह उदाहरण मात्र है। सवाल यह है कि आखिर वाहन कहां गए।
नगर निगम के पास कचरा ढुलाई के लिए ट्रक, ट्रैक्टर ट्रॉली, जेसीबी, पोकलेन, छोटे कचरा ढुलाई व कलेक्शन वाहन सहित कई प्रकार के वाहन हैं। गैराज के रिकॉर्ड के अनुसार इन वाहनों की संख्या 326 है, लेकिन गैराज में खड़े वाहनों की गिनती करें तो वह 150 तक भी नहीं पहुंचती। सवाल यह है कि बाकी वाहन कहां गए। गैराज कर्मचारियों का कहना है कि कुछ वाहन नूर बस्ती में खड़े किए जाते हैं। ऐसा है तो फिर स्टेडियम के सामने गैराज पर करोड़ाें रुपये क्यों खर्च किए गए।
नगर निगम के वाहन वास्तव में गैराज में ही रहते हैं या नहीं। इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि शारदानगर स्थित एक निजी वर्कशॉप में बीते पांच साल से नगर निगम के तीन वाहन बंद हैं। इनमें छोटी पोकलेन, एक बुलेरो कार और तीसरा अन्य वाहन हैं। टीम की तरफ से निजी वर्कशॉप के संचालक से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि वाहन ठीक होने के लिए आए थे। निगम की तरफ से भुगतान नहीं किया गया, इसलिए वाहन अभी तक उनकी वर्कशॉप में खड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि पांच साल से वाहन निजी हाथों में क्यों है।
कर्मचारी के खेतों में चलते मिले थे ट्रैक्टर
करीब 15 वर्ष पहले नगर निगम के ट्रैक्टर और जेसीबी एक कर्मचारी के खेतों में चलते मिले थे, जिनको अधिकारियों ने पकड़ा था। करीब पांच वर्ष पहले शकलापुरी मार्ग पर एक अवैध कॉलोनी में जमीन समतल करते हुए निगम की जेसीबी पकड़ी गई थी। तीन वर्ष पहले भी एक कर्मचारी के सरसावा स्थित खेतों में उद्यान विभाग के ट्रैक्टरों से काम कराया गया। ऐसे में इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि ट्रैक्टर आदि किसी के घर या खेत में खड़े हों।
बिना जरूरत के होती है खरीद
हो सकता है, नगर निगम के पास जितने वाहन हैं, उतनों की जरूरत रहती हो, लेकिन ऐसा लगता नहीं है क्योंकि दो से तीन साल पहले लाखों रुपये से खरीदे गए वाहन कचरा बनने के लिए छोड़े गए हैं और एक दर्जन वाहन पिछले महीने ही खरीदे गए हैं। इनमें सीवर साफ करने वाली मशीनें भी हैं, जबकि सीवर सफाई का काम निजी कंपनी पर है। चर्चा है कि वाहनों की खरीद में भी खेल होता है।
यदि नगर निगम के वाहन वर्षों से निजी वर्कशॉप में खड़े हैं तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही सभी 326 वाहनों को सूचीबद्ध किया जाएगा कि वह हमारे गैराज में हैं या फिर नहीं।
-शिपू गिरि, नगर आयुक्त।