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अस्पतालों से बाहर से बाइकें चुराने वाला गिरोह पकड़ा

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सहारनपुर। नगर कोतवाली पुलिस ने जिला अस्पताल, निजी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या दवा की दुकानों के बाहर खड़े वाहनों को चोरी कर उन्हें दूसरे राज्य के शहरों में बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सात सदस्यों को पकड़ा है। पुलिस ने गिरोह के सदस्यों के कब्जे से चोरी की गई 12 बाइक बरामद करने का दावा किया है। पकड़े गए आरोपियों में दो उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के हैं। इनके कब्जे से वाहनों के कुछ पार्ट्स, मोबाइल, छुरी और अन्य सामान भी मिला है। गिरोह का नेटवर्क जानने को पुलिस अभी और छानबीन कर रही है।
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नगर कोतवाली में एसपी सिटी विनीत भटनागर ने बताया क्षेत्र में वाहन चोर गिरोह के सक्रिय होने की कुछ सूचनाओं के आधार पर नगर कोतवाली के वरिष्ठ उप निरीक्षक अनिल कुमार, उप निरीक्षक लोकेंद्र राणा, अतुल कुमार, धर्मेंद्र कुमार सहित अन्य की सदस्यों की टीम को लगाया। इस टीम ने सात बदमाशों को गिरफ्तार किया। इनमें राजा उर्फ इंतेेसार निवासी ढमोला नदी थाना सदर, अमित पाल निवासी हकीकत नगर थाना सदर, रोहित शर्मा निवासी पंजाबी बाग थाना सदर, उस्मान निवासी छोटी लाइन थाना सदर, अंशुल उर्फ काला निवासी पंजाबी बाग शहर के ही रहने वाले हैं। इनके अलावा उत्तराखंड के जिला हरिद्वार के थाना गंगानगर के पनियाला निवासी मोनू और बबलू शामिल हैं। एसपी सिटी ने बताया कि गिरोह के नेटवर्क के बारे में और पड़ताल अभी जारी है।
एक ही क्षेत्र के युवाओं ने बना लिया गिरोह
चोरी के वाहन बेचकर पैसे जुटाने के लिए एक ही क्षेत्र पंजाबी बाग के रहने वाले युवाओं ने यह गिरोह बना लिया। इस गिरोह का मुख्य आरोपी राजा है, जो शातिर चोर है। उन्होंने जिले के कई थानों में वाहन चोरी की घटनाएं की हैं। इसने ही गिरोह के सदस्यों को घटनाओं के लिए अधिक सक्रिय किया। वाहन चोरी करने के बाद ये इंजन और चेसिस नंबर को खुर्द बुर्द कर उत्तराखंड के रुड़की, हरिद्वार सहित अन्य शहरों में गाड़ी को बेच देते थे।
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वाहनों की बिक्री के लिए मोनू और बबलू से होती थी डील
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उत्तराखंड के शहरों में चोरी के वाहनों की बिक्री के लिए मोनू और बबलू के माध्यम से डील होती थी। वही, ऐसे वाहनों को वहां ठिकाने लगवाते थे। कभी-कभी सामने वाले की जरूरत के अनुसार वाहनों के पार्ट्स भी बेचते रहे हैं।
अस्पतालों के बाहर आसानी से मिलता था मौका
पकड़े गए चोरों ने बताया अन्य सार्वजनिक स्थलों की जगह जिला अस्पताल या अन्य अस्पतालों के बाहर बाइक चुराने का मौका आसानी से मिल जाता था। यहां मरीज के तीमारदार लंबे समय तक व्यस्त रहते हैं और लोगों की भीड़ अधिक रहती है। इसके चलते ही ऐसी जगहों पर ही अधिकतर घटनाएं की गईं।
अस्पतालों में सुरक्षा पर भी उठे सवाल
जिला अस्पताल और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में पुलिस या होमगार्डों के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। निजी चिकित्सालय भी अपने स्तर पर सुरक्षा गार्ड रखते हैं। इनके बाद भी चोर सुरक्षा तंत्र को चकमा देकर वाहनों की चोरी करते रहे हैं। यह लापरवाही मिलने पर अस्पतालों में पुलिस और होमगार्डों की टीमों को अलर्ट रहने की चेतावनी दी गई है।
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