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वुडकार्विग उद्योग बचाना है तो स्पेशल पैकेज दे सरकार

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आईआईए अध्यक्ष रविन्द्र मिगलानी - फोटो : SAHARANPUR
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कोरोना इफेक्ट्स से खतरे में जिले के 2.50 लाख परिवारों का भविष्य
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सहारनपुर। विश्वविख्यात वुडकार्विग उद्योग के लिए खास पहचान रखने वाला जिला कोरोना संक्रमण के मामले में बेहद संवेदनशील होता जा रहा है। पिछले करीब दो माह से उद्योग व्यापार पूरी तरह ठप है। जिले में वुडकार्विंग, पेपर, हौजरी, केमिकल सहित कई तरह की 500 से अधिक औद्योगिक इकाइयों और लाखों मजदूरों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे गंभीर हालात में जिले के उद्यमियों और मजदूरों को सरकार से बड़ी राहत की उम्मीद हैं। ताकि रोजगार, कारोबार के साथ जिंदगी भी बची रहे। ऐसे ही कई मुद्दों पर अमर उजाला से बातचीत की आईआईए सहारनपुर के चेयरमैन रविंद्र मिगलानी ने।
सवाल : कोरोना संक्रमण के बाद लॉकडाउन का उद्योगों पर क्या इफेक्ट पड़ा है।
जवाब : विश्वविख्यात वुडकार्विंग से लेकर अन्य उद्योगों पर बुरा असर पड़ा है। जिले में 500 से ज्यादा छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। इनसे 2.50 लाख परिवारों की रोजी रोटी जुड़ी है।
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सवाल : जिले के सबसे बड़े और करोड़ों का राजस्व देने वाले वुडकार्विंग उद्योग के लिए कम से कम क्या होना चाहिए।
जवाब : कोराना संक्रमण के बाद से यूके, यूएसए सहित अन्य सभी देशों से आर्डर ब्लॉक हैं। आगे भी महीनों या साल भर तक ऐसे ही हालात की आशंका है। ऐसे में साल में कम से कम 500 करोड़ का राहत पैकेज तो सरकार जरूर दे।
सवाल : लाखों मजदूरों के रोजगार और वेतन पर संकट है। आपकी क्या रणनीति है।
जवाब : इस समय उद्योगों के हालात गंभीर है। इसके बावजूद लगभग सभी मजदूरों को मार्च माह का वेतन दे दिया गया है। मगर अप्रैल माह के वेतन पर संकट है। अधिकतर उद्यमी प्रयास कर रहे हैं कि 50 प्रतिशत वेतन तो कम से कम दिया जाए। लेकिन मजदूरों के परिवारों के जीवन निर्वहन के लिए सरकार की ओर से भी 25 से 30 फीसदी तक राहत इस मद के लिए दी जाए।
सवाल : उद्योगों और मजदूरों को बचाने के लिए और क्या विकल्प हो सकते हैं।
जवाब : सरकार की ओर से राहत पैकेज के साथ ही जीएसटी सहित अन्य रूपों में लिए जाने वाले टैक्सों में भी कम से कम एक साल तक की छूट दी जानी चाहिए। तभी उद्योग और मजदूर खुद को बचा पाएंगे।
सवाल : लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे के बावजूद सरकार ने कुछ उद्योगों के संचालन की छूट दी है। जिले में कौन से उद्योग चल सकते हैं।
जवाब : मोटे तौर पर पेपर, स्टील, हौजरी, चीनी मिल सहित नौ श्रेणी के उद्योग चल सकते हैं। मगर सहारनपुर मंडल बेहद संवेदनशील हैं। यहां 30 से अधिक हॉट स्पाट हैं। इन उद्योगों की संभावना भी बेहद कम है। यदि इनका संचालन हुआ तो भी 20 से 30 फीसदी मजदूरों को ही काम का मौका मिलेगा।
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सवाल : ऐसे हालात में आपका उद्यमियों और मजदूर वर्ग के लिए क्या संदेश है।
जवाब : सबसे पहले तो यही कहना चाहते हैं कि जान है तो जहान है। कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए ही औद्योगिक इकाइयों का संचालन होना चाहिए। ऐसा भी न हो जाए कि कुछ उद्योग चलने के बाद हालात और गंभीर हों। उद्योग संचालन की स्थिति में मजदूरों को विशेष पास जारी हों। साथ ही सभी लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर अन्य सावधानियां अपनाना जरूरी है।
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