फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजकीय सम्मान के साथ बीएसएफ जवान आदेश का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन

विज्ञापन
विज्ञापन
राजकीय सम्मान के साथ बीएसएफ जवान आदेश का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन
विज्ञापन

अंबेहटा। बीएसएफ की 113 एफ बटालियन मणिपुर में तैनात जैनपुर गांव के जवान की ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई। मंगलवार की सुबह जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में पहुंच कर जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की।
जैनपुर गांव निवासी रामनाथ ने बताया कि उसका छोड़ा भाई 30 वर्षीय आदेश पुत्र धर्म सिंह बीएसएफ की 113 एफ बटालियन में कांस्टेबल था। वर्तमान में आदेश की तैनाती मणिपुर में थी। पार्थिव शरीर गांव लेकर पहुंचे 113 एफ बटालियन के एएसआई अनिल कुमार ने बताया कि तीन दिन पहले आदेश को ड्यूटी के दौरान उल्टी हुई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे तत्काल आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया, परंतु हालत गंभीर होने के कारण आदेश को पहले चूड़ा चांदपुर मणिपुर व उसके बाद इंफाल में स्थित एम्स में भर्ती कराया। वहां उपचार के दौरान आदेश ने दम तोड़ दिया। अनिल कुमार के मुताबिक चिकित्सकों ने आदेश की मौत का कारण ब्रेन हेमरेज होना बताया है।
विज्ञापन

मंगलवार की सुबह आदेश का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव पहुंचा तो पूरे गांव में मातम छा गया। हर कोई आदेश के अंतिम दर्शन को उमड़ पड़ा। आदेश तीन बहन भाइयों में दूसरे नंबर का था। आदेश के भाई रामनाथ ने चिता को मुखाग्नि दी। इससे पूर्व सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने जवान के सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर देकर मातमी धुन बजाई और हवाई फायर किये। श्रद्धांजलि देने वालों में प्रदेश के आयुष मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी, कैराना सांसद प्रदीप चौधरी, जगपाल दास, पूर्व विधायक शशीबाला पुंडीर और महीपाल माजरा, अजय सिरोही, मानसिंह वर्मा, नरेश शर्मा, कमलेश चौधरी, संदीप चौधरी, अंबेहटा चेयरमैन पति चौधरी इनाम शाकिर, एसडीएम नकुड़ पूरण सिंह राणा, सीओ यतेंद्र सिंह नागर, कोतवाल सुशील कुमार सैनी, चौकी प्रभारी नरेश सिंह आदि रहे।
विज्ञापन

पत्नी और बच्चों पर टूटा गम का पहाड़
कांस्टेबल आदेश के पत्नी रुचि के अलावा तीन वर्ष की पुत्री पीहू और चार माह के पुत्र वीशू है। जिस समय आदेश के मौत की खबर गांव में पहुंची तो उस समय आदेश की पत्नी अपने मायके में थी। पत्नी को आदेश के घायल होने की खबर देकर गांव लाया गया। गांव पहुंच कर जब पत्नी को आदेश की मौत की सच्चाई का पता लगा तो उस पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। अंतिम यात्रा शुरू होने से पूर्व जैसे ही आदेश का भाई रामनाथ उसके चार माह के बेटे वीशू को पिता के अंतिम दर्शन कराने के लिए लाया तो वहा मौजूद लोगों की आंखें भर आई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें