सहारनपुर। टिड्डी दल की घुसपैठ की आशंका के बीच किसानों को फसलों के नुकसान की चिंता सता रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों को यह जानकारी लगी है कि टिड्डी दल हरियाणा के आसपास दस्तक दे चुके हैं। कीटनाशक सहित अन्य चीजों के प्रयोग से टिड्डी दल को मार गिराने की विधि तो सभी को पता है, लेकिन कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक ‘मित्र फफूंद’ से टिड्डी दल को मार गिरा सकते हैं। इसका आसानी से मिलना भी सुलभ है।
टिड्डी दल की घुसपैठ की आशंका को लेकर कृषि, उद्यान, गन्ना और कृषि विज्ञान केन्द्र ने अलर्ट जारी किया है। कृषि वैज्ञानिक नियंत्रण के उपायों के बारे में किसानों को जागरूक कर रहे हैं। उनका दावा है कि मेटाराइजियम एनीसोप्ली नामक ‘मित्र फफूंद’ टिड्डियों को नियंत्रित करने में कारगर साबित हो सकती है। ‘मित्र फफूंद’ के संपर्क में आने से टिड्डियां बीमार होकर मर जाएंगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि जनपद में पहुंचने की आशंका के चलते सभी विभागों ने अलर्ट जारी किया है। टिड्डी दल जिस भी स्थान पर रात को रुकता है वहां की करीब 90 प्रतिशत तक फसलों और वृक्षों की पत्तियों को खाकर नष्ट कर देता है। इसके अलावा मादा टिड्डियां वहां की मिट्टी में लगभग 15 सेंटीमीटर नीचे अंडे दे देती है। इसके शिशु और वयस्क दोनों ही फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। दावा किया कि इस टिड्डी पर रासायनिक कीटनाशकों के अलावा मेटराइजियम एनीसोप्ली नामक जैविक मित्र फफूंद भी नियंत्रण करने में कारगर साबित हो सकती है।
ऐसे करें नियंत्रण, जमीन की कर दें जुताई
केवीके प्रभारी डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए किसानों को अपने खेत में मेटरसाइजियम एनीसोप्ली नामक ‘मित्र फफूूंदी’ का प्रयोग करना चाहिए। इस फफूंद की दो किलो मात्रा को 50 किलो गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर कुछ दिन छाया में सुखाकर शाम के समय एक एकड़ खेत में बिखेरकर मिट्टी में मिला दें। जब टिड्डी दल इस खेत में बैठेगा तो इस ‘मित्र फफूंदी’ के बीजाणु उन्हें रोगग्रस्त कर देंगे। जिससे वह एक सप्ताह के अंदर मर जाऐंगे। किसान अपने खाली पड़े खेत की जुताई जून के अंत तक कर दें। जिससे इन टिड्डियों के अंडे, प्यूपा आदि जमीन की ऊपरी सतह पर आ जाएंगे और तेज धूप के साथ ही पक्षी इन्हें नष्ट कर देंगे।