सहारनपुर में किसानों के मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में उतरने वालों पर इस बार किसानों की पूरी तरह से नजर लगी हुई है। किसानी से मुक्त मौसम में किसान चुनावों में पूरी तरह से रम गए हैं और मतदान करने को लेकर भी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
मौसम का मिजाज और किसानों का उत्साह से इस बार मतदान प्रतिशत को बढ़ाने की उम्मीद नजर आ रही है। सहारनपुर में पिछले विधानसभा चुनावों में मतदान तो खूब हुआ, फिर भी आसपास के जिलों की अपेक्षा कम ही रह गया।
सहारनपुर में विधानसभा चुनावों में 68 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इस बार प्रशासन ने वोटिंग प्रतिशत को बढ़ाने के लिए पुरजोर कोशिशें शुरू कर दीं हैं। न सिर्फ होर्डिंग लगवाए और गांवों में जाकर लोगों को जागरूक किया, बल्कि सामाजिक संस्थाओं तथा उम्मीदवारों से भी अधिक मतदान की अपील कराई जा रही है।
इस बार चुनावों का ऐसा मौसम है, जब किसान पूरी तरह से खेती के कार्य से मुक्त है। खेतों में न तो बुवाई का कार्य चल रहा है और न ही कटाई का कार्य है। जो भी कार्य खेतों में शुरू होगा, वह कम से कम एक माह बाद शुरू होगा।
ऐसे में किसान भी राजनीतिक द्वंद्व में कूद पड़े हैं और चुनावों में पूरी तरह से सक्रियता दिखा रहे हैं। चौपालों पर चुनावी चर्चाओं के साथ-साथ किसान अपने-अपने वोट का प्रयोग करने के लिए आतुर नजर आ रहे हैं।
लखनौती में हुई किसानों की हुक्का पंचायत में भी किसानों ने इस बार शत प्रतिशत मतदान करने की हुंकार भरी है। खेती से फारिग किसानों की राजनीति में बढ़ती रुचि को देखकर मतदान प्रतिशत बेहतर होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार क्षेत्र में किसान इस समय खेती से लगभग फ्री हैं। वसंतकालीन गन्ने की बुवाई होनी है जो 15 फरवरी के बाद ही शुरू होगी। ऐसे में किसानों के पास पर्याप्त समय है।
किसान नेता देवेंद्र चौधरी का कहना है कि शुगर मिलें चल रहीं हैं, गन्ना किसान इस समय गन्ने की छिलाई कर रहा है। लेकिन अधिकांश गन्ने की छिलाई मतदान से पूर्व ही पूरी हो जाएगी।