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सहारनपुर में चार लोगों की मौत: खंभे में टक्कर लगते ही कार से बाहर आकर गिरे दो शव, फंसी रह गईं खून सनी दो लाशें

Sun, 28 Dec 2025 12:43 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर

सार

Saharanpur News: शाकंभरी देवी रोड पर तीव्र मोड़ पर कार की रफ्तार काबू नहीं हो सकी और खंभे से टकरा गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ऐसा लगा जैसे धमाका हुआ है। पुलिस और लोगों ने कार में फंसे शवों को बाहर निकाला। 
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जितेंद्र और मनीष (ऊपर) और विजय और सोनू (नीचे) की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेहट स्थित शाकंभरी देवी रोड पर शनिवार शाम हुए भीषण हादसे की वजह कार की तेज रफ्तार मानी जा रही है। सड़क पर जिस जगह हादसा हुआ, वहां तीव्र मोड़ है। चालक तेज रफ्तार के चलते नियंत्रण खो बैठा और कार लोहे के पोल से टकराते हुए पेड़ से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार सवार दो लोग तो छिटक कर बाहर जा गिरे, जबकि दो के शव अंदर ही फंसे रह गए।
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विलाप करती जितेंद्र की पत्नी मीरा। - फोटो : अमर उजाला
घटनास्थल पर खड़े प्रत्यक्षदर्शी गांव फतेहपुर कलां निवासी संजय चौहान और नौगांवा निवासी राहुल ने बताया कि कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि पहले वह पोल से टकराई और फिर पेड़ से टकराकर वापस सड़क के बीचोंबीच आकर गिरी। एक बारगी ऐसा लगा जैसे कहीं बम फट गया हो। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। दो लोगों के शव सड़क पर क्षत विक्षत हालत में पड़े थे, जिनके चेहरे भी पहचाने नहीं जा रहे थे। अंदर कार में फंसे दो लोगों को भी पुलिस की मदद से लोगों ने काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।

हादसे में कार के उड़े परखच्चे। - फोटो : अमर उजाला
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, चारों अपने घर में इकलौते थे कमाने वाले
हादसे में मारे गए चारों लोगों के परिवारों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। दरअसल, चारों अपने परिवारों में कमाने वाले इकलौते थे। उनकी मौत के बाद परिजनों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सगे भाइयों में मनीष मुजफ्फराबाद में चिकित्सक था। उसने वहां क्लीनिक खोल रखा था। उसके दो बेटे हैं। मनीष का भाई विजय शाकंभरी देवी के पास नागल माफी में मेडिकल स्टोर चलाता था। उसकी तीन बेटियां हैं। दोनों मृतकों के पिता मेम सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। विजय चार भाइयों में सबसे बड़ा था, मनीष तीसरे नंबर का था। मेम सिंह दो जवान बेटों और साढू की मौत के बाद बदहवास हो गए। हादसे की खबर के बाद लोग उनके घर सांत्वना देने पहुंचने लगे। 
 

तीसरा मृतक जितेंद्र इनका सगा मौसा था। वह बेहट के मोहल्ला माजरी में पिछले 15 साल से घर ससुराल में रह रहा था। वह रंगाई पुताई का काम करता था। उसकी चार बेटियां हैं। इनमें सबसे बड़ी जिया 15 साल, अनुष्का 12, सिमरन छह और सबसे छोटी इंदु चार साल की है।
 

चौथा मृतक सोनू हलवाई का काम करता था। सोनू, मनीष का दोस्त था। उसे चार छोटे बच्चे हैं। सभी मृतक अपने परिवारों में कमाने वाले अकेले व्यक्ति थे। उनकी मौत के बाद परिजनों के सामने भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
 

जाते-जाते जख्म दे गया 2025 का साल
साल के आखिरी सप्ताह में यह दिसंबर माह का सबसे बड़ा हादसा है, जिसमें चार लोग अकाल मौत का शिकार बन गए। इससे पहले नवंबर में 28 नवंबर को गागलहेड़ी थाने के सोना सैयद मजरा में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बजरी से भरा डंपर कार पर पलटने से सोना गांव निवासी संदीप सहित उसके सात परिजनों की मौत हो गई थी।
 

पेड़ से टकराई बेकाबू कार 
शाकंभरी देवी रोड पर फतेहपुर कलां गांव के पास मोड़ पर शनिवार को भीषण सड़क हादसा हुआ। तेज रफ्तार स्विफ्ट डिजायर कार सड़क किनारे खड़े लोहे के पोल से टकराने के बाद पेड़ से जा भिड़ी। इसमें चिलकाना के गांव तिड़फवा निवासी विजय (35) उसके भाई डॉ. मनीष (32), उनके मौसा जितेंद्र (45) निवासी महमूदपुर तिवाई गागलहेड़ी और मुजफ्फराबाद निवासी सोनू (30) की मौत हुई। हादसा शनिवार शाम करीब पांच बजे हुआ। 
 
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ये बोले सीओ
हादसा शाकंभरी रोड पर हुआ है। कार में चार लोग सवार थे। कार तेज रफ्तार होने के कारण अनियंत्रित हुई। इसके चलते पेड़ से टकराई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को बाहर निकाला। 
- एसएन वैभव पांडेय, सीओ


 
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