लोहानी सराय की सड़क नगर निगम तीन साल में दो बार बनवा चुका है, लेकिन वह भी बहुत अच्छी हालत में नहीं है। वहीं, पेपर मिल रोड दो वर्ष पहले ही विकास प्राधिकरण ने बनाया था। आरसीसी से बने इस रोड में जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। हकीकतनगर तिराहे से कलक्ट्रेट तिराहे तक की सड़क एक वर्ष पहले बनाई गई थी, जो जगह-जगह से धंस गई है। यही हाल महानगर को चारों ओर बने हाईवे से जोड़ने वाले मार्गों की है। इनमें देहरादून रोड और दिल्ली रोड की हालत सबसे खराब है।
नहीं टिकी मॉडल रोड, ढक्कन भी हो गए गायब
नगर निगम ने घंटाघर से हसनपुर चौक तक मॉडल रोड का निर्माण कराया था। इस रोड को पांच साल तक दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी संबंधित निर्माण एजेंसी की थी, लेकिन सड़क को दो साल बाद ही स्मार्ट सिटी के तहत ले लिया गया। इसके बाद निर्माण एजेंसी का पीछा छूट गया और वह पांच साल की गारंटी के साथ भुगतान लेकर चलती बनी। निर्माण करने वालों में एक जनप्रतिनिधि का भाई भी शामिल बताया जा रहा है। इतना ही नहीं, घंटाघर से कोर्ट रोड पुल तक फुटपाथ की जगह नाले पर सीमेंट के ढक्कन रखे गए थे, जो गायब हो गए।
स्मार्ट रोड की लायबिलिटी दो साल
स्मार्ट सिटी योजना के तहत महानगर में 23 किलोमीटर की स्मार्ट रोड तैयार की जा रही हैं। इन सड़कों के निर्माण पर करोड़ों रुपया खर्च हो रहा है। जिनकी लायबिलिटी दो साल है। इसमें निर्माण एजेंसी का दस फीसदी पैसा रोका जाता है, जिसका भुगतान दो साल बाद उस स्थिति में किया जाता है यदि सड़क ठीक रही हो।