हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए गए। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम कारी इसहाक गोरा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि बच्चों को जबरदस्ती रोजा रखवाना गुनाह है। उन्होंने कहा कि रोजेदारों की दुआ अल्लाह पाक फौरन कुबूल करता है। इसीलिए रोजेदारों को चाहिए कि वह अपने और देश की तरक्की के लिए खूब दुआ करे। इसके साथ ही रोजे के उसूल को समझते हुए रोजा रखे।
सवाल :- नखासा बाजार निवासी बरिराह इकबाल ने सवाल किया उनका बेटा जिसकी आयु सात वर्ष पांच माह है और काफी कमजोर है। उनके पति चाहते हैं बेटा रोजा रखे क्योंकि, उनके खानदान में इतनी उम्र में रोजा रखने का रिवाज है। ऐसी सूरत में शरीयत क्या कहती है।
जवाब- पांच-छह वर्ष के बच्चों को नाम या शोहरत या रस्म व रिवाज की खातिर रोजा रखवाना मुनासिब नहीं है।
उनको जबरदस्ती रोजा रखवाना गुनाह है। शरीयत के अनुसार लड़का या लड़की बालिग हो जाएं यानी चांद की तारीखों के एतबार से 15 वर्ष के समझे जाएं, लेकिन शर्त ये भी है कि बालिग होने के लिए जो पहचान होती है वह लड़की या लड़के को 15 वर्ष से पहले ही होना शुरू हो जाए। तब ही उनको बालिग समझा जाएगा। शरीयत के अनुसार बच्चों को रोजा रखवाने की आदत शुरू करने का बेहतर तरीका यह है कि बच्चा जब 10 या 11 वर्ष का हो जाए तो उनसे रोजा रखवाया जाए। ताकि बालिग होते-होते वह रोजा रखने के आदि हो जाएं।
सवाल:- आली की चुंगी निवासी अब्दुल वाहिद ने जकात के बारे में पूछा कि उनकी माह की आमदनी तकरीबन 70 हजार है, लेकिन साल भर तक उनके पास निसाब की मिकदार जमा नहीं होती, जिस पर जकात फर्ज हो। अब क्या ऐसी सूरत में भी उन पर जकात फर्ज है।
जवाब:- जी नहीं! जिस व्यक्ति की आमदनी माकूल है, परंतु साल भर तक उसके पास निसाब की मिकदार जमा नहीं रहती तो उस पर जकात वाजिब नहीं है।
सवाल:- गंगोह निवासी शाकिर अली ने मालूम किया कि वह रोजे की हालत में सिर पर तेल लगाना चाहते हैं। कहीं से सुना है रोजे में तेल नहीं लगाना चाहिए। इससे रोजा टूट जाता है। ये बात कहां तक सही है।
जवाब:- जो लोग ये समझते हैं रोजे की हालत में तेल लगाने से रोजा टूट जाता है, यह बात सरासर गलत है। रोजे की हालत में जिस्म के किसी भी हिस्से पर तेल लगाया जा सकता है। इससे रोजे पर कोई असर नहीं आएगा।