सहारनपुर। गन्ना बेल्ट कहे जाने वाले जिले में गन्ना किसान परेशान हैं। जिले की आठ में दो चीनी मिलों का संचालन इस वर्ष नहीं होगा। बेहट क्षेत्र स्थित शाकुंभरी शुगर मिल पिछले वर्ष संचालित नहीं हुई थी, जबकि इस वर्ष गागलहेड़ी स्थित दया शुगर मिल ने भी गन्ना विभाग में संचालन में असमर्थता जताते हुए पत्र भेजा है। विभाग ने दया शुगर मिल के केंद्र भी अन्य मिलों को आवंटित कर दिए हैं।
नए पेराई सत्र को लेकर मिल संचालन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। गन्ना विभाग भी मिलों के संचालन को लेकर जोर आजमाइश कर रहा है। आठ में से दो चीनी मिलों का संचालन न होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। दया शुगर मिल के संचालन न होने को लेकर कर्मचारी से लेकर किसान यूनियन भी धरना प्रदर्शन कर चुकी है। दया शुगर मिल के हिस्से में करीब 90176 हेक्टेयर रकबा आता है। इस वर्ष गन्ना विभाग को 75.46 लाख क्विंटल गन्ना उत्पादन का अनुमान था। चीनी मिल के संचालन न होने की स्थिति में गन्ना सेंटरों को अन्य चीनी मिलों को वितरित किया गया है।
दया शुगर मिल के सेंटरों को बिड़वी, शेरमऊ, देवबंद और मुजफ्फरनगर की खाईखेड़ी मिल में सेंटर दिए गए हैं। क्षेत्र के सेंटर अन्य मिलों में जाने से न सिर्फ किसानों को परेशानी होगी, बल्कि उनकी लागत भी बढ़ेगी। मिल के 29 सेंटरों में से बिड़वी मिल को आसनवाली, पुवांरका, संभलहेड़ी, चंद्रौली, लखनौती, बेहड़ी गुर्जर, पीकी, बेहड़ाकला, जंधेड़ा तृतीय, मिर्जापुर व रंडोल के 11 सेंटर मिले हैं। मुजफ्फरनगर की खाईखेड़ी को छाछरेकी, चौड़ादेव, अमरपुर व चौराखुर्द चार सेंटर दिए गए हैं। इसी तरह अन्य मिलों को भी सेंटर आवंटित किए गए हैं।
- बोले किसान
- चौरादेव के किसान गौरव यादव ने कहा कि किसानों के सामने अब आर्थिक रूप से समस्या खड़ी हो जाएगी। क्षेत्र के मिल कर्मचारी और किसान दोनों को मिल न चलने से भारी नुकसान होगा। इस दिशा में प्रयास होने चाहिए।
- बडूली गांव के किसान दर्शन लाल शर्मा ने बताया कि दया शुगर मिल न चलने से किसानों को भारी नुकसान होगा। साथ ही ये क्षेत्र के लिए भी बेहतर नहीं है। किसानों को जहां गन्ना डालने की समस्या उत्पन्न होगी। वहीं मिल कर्मचारी भी बेरोजगार हो जाएंगे। मिल संचालन सभी के हित में हैं।
- वर्जन
दया शुगर प्रबंधन की ओर से संचालन के संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। किसानों को परेशानी न हो, इसका ख्याल रखा जाएगा। मिल के सेंटर भी अन्य मिलों को आवंटित किए गए हैं। शाकुंभरी मिल भी इस वर्ष संचालित नहीं होगी।
- शैलेश कुमार मौर्य, जिला गन्ना अधिकारी