सहारनपुर। जिले के सरकारी अस्पताल पहले ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। अब पांच चिकित्सक पीजी (परास्नातक) की पढ़ाई करने के लिए गए हैं। तीन चिकित्सकों ने प्रतिनियुक्ति पाई है, जबकि चार चिकित्सक आठ साल से नहीं लौटे हैं। इन्होंने अलग-अलग साल में त्यागपत्र दिया था। स्वास्थ्य विभाग ने सभी की रिपोर्ट शासन में भेज दी है।
जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक चिकित्सकों की कमी है। चिकित्सकों के अभाव में लोगों को इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। सबदलपुर सीएचसी पर तैनात डॉ. विकास कुमार फिरोजाबाद, पीएचसी फुलासगढ़ से डॉ. विकास पाल कानपुर, सीएचसी नागल से डॉ. हरेंद्र बांदा, चिलकाना सीएचसी पर डॉ. रौली वर्मा बलरामपुर और टीबी अस्पताल में तैनात डॉ. आशीष कुमार बांदा मेडिकल कॉलेज में पीजी की पढ़ाई करने के लिए गए हैं।
इनके अलावा पीएचसी टाबर से डॉ. हितेश कुमार, पीएचसी नल्हेड़ा गुर्जर से डॉ. अंकुर शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग छोड़ दिया और प्रतिनियुक्ति पर बुलंदशहर में चिकित्सा शिक्षा में तैनाती पाई है। इनके साथ ही सीएचसी फतेहपुर पर रहे डॉ. अरुण प्रताप सिंह ने सीआरपीएफ मेरठ में प्रतिनियुक्ति मिली। डॉ. गोपाल सिंह ने 2017, डॉ. अमनदीप कौर ने 2018, डॉ. रीना सिंह और डॉ. सागर मलिक ने 2019 में त्यागपत्र दिया था। इसके बाद से कोई भी चिकित्सक वापस नहीं लौटा है। लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे।
जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सक पीजी की पढ़ाई करने के लिए गए हैं। कुछ चिकित्सकों ने प्रतिनियुक्ति पाई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
- डॉ. प्रवीण कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी