फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेपोटिज्म से मिलेगी मुक्ति, प्रतिभाओं को मुकाम

विज्ञापन
विज्ञापन
नेपोटिज्म से मिलेगी मुक्ति, प्रतिभाओं को मुकाम
विज्ञापन

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश में फिल्म बनाए जाने की कवायद को लेकर फिल्मी कलाकार उत्साहित हैं। सहारनपुर की धरती से कई नामचीन कलाकार हुए हैं, जिन्होंने मुंबई में जाकर नाम कमाया है तो बहुत सी प्रतिभाएं ऐसी हैं जो मुंबई तक पहुंचने के संघर्ष में खो गईं। ऐसी प्रतिभाओं को ग्रेटर नोएडा में फिल्म सिटी बनने पर मुकाम हासिल करने में मदद और उचित माध्यम आसानी से मिल सकेगा। मुंबई में रहकर रुपहले पर्दे पर अदाकारी कर रहे सहारनपुर के कलाकारों और पटकथा लेखक से अमर उजाला संवाददाता ने फोन पर बातचीत की। अधिकांश ने यूपी में फिल्म सिटी को बेहतर सौगात बताया। पेश से उनसे बातचीत पर आधारित रिपोर्ट...
नेपोटिज्म से निजात, प्रतिभा को मिलेगा मुकाम : कायनात अरोड़ा
फिल्म अभिनेत्री कायनात अरोड़ा कहती हैं कि यह बहुत अच्छा निर्णय है। मुंबई और हैदराबाद में फिल्म सिटी है, लेकिन यूपी की प्रतिभाओं को वहां पहुंचकर खुद को साबित करना कई मायने में मुश्किल हो जाता है। अब उन नौजवानों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने और निखारने का मौका मिलेगा, जो मुंबई में पहुंचकर खो जाते थे। इससे मुंबई में चल रहे नेपोटिज्म से भी मुक्ति मिलेगी, साथ ही संसाधनों के लिहाज से फिल्म बनाने पर होने वाले खर्च को तुलनात्मक रूप से देखें तो यूपी में खर्च कम होगा। वहीं यूपी के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
विज्ञापन

प्रयास अच्छा है, मगर कल्चर विकसित करना अहम : इनाम उह हक
फिल्म कलाकार इनाम उल हक का कहना है कि फिल्म बनाने के लिए कल्चर की जरूरत है, फिल्म सिटी बनाया जाना अच्छा। लखनऊ में वैनिटी वैन मिल जाती है तो मुंबई से मंगाने की जरूरत नहीं है। सामान मुहैया करा दे तो बहुत बड़ी बात है, लेकिन इससे कोई चमत्कार नहीं हो सकता। मायानगरी मुंबई से उठकर नहीं आ सकती। बेशक मुंबई में फिल्म कम ही बनती हैं, लेकिन वहां फिल्में बनाने का कल्चर विकसित है।
मुंबई में रहना, खाना सबसे मुश्किल : सैनी
पटकथा लेखक सीएल सैनी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी का बनना सोभाग्य की बात है। पूर्वांचल हो या पश्चिमी यूपी, यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं। हर जिले में प्रतिभाएं हैं, लेकिन उन सभी को मुंबई पहुंचकर अपनी प्रतिभा को परिपक्व रूप देना आसान नहीं होता। बिरले लोग ही मुंबई आकर कामयाब हो पाते हैं। मुंबई आने पर रहने, खाने की व्यवस्था ही सबसे भारी होती है। फिल्म सिटी यूपी में स्थापित होने पर प्रतिभा घर में रहते हुए सीमित खर्च और संसाधनों के साथ निखरेगी। मुंबई के कल्चर में आकर लोग दब जाते हैं। मुंबई आकर टिकने का संघर्ष खत्म हो जाएगा और प्रतिभा मुकाम हासिल कर सकेगी। यूपी सरकार जितना जल्दी हो सके, इसे क्रियान्वित करे।
विज्ञापन

मुंबई जाकर नहीं झेलना पड़ेगा उत्पीड़न : ब्रजेश
फिल्म कलाकार ब्रजेश कर्णवाल का कहना है कि घर छोड़कर माता पिता से दूर थे, घर में कुछ हो जाए तो सोचना पड़ता था कि क्या किया जाए। फिल्म सिटी यूपी में बन जाएगी तो दिल्ली दूर नहीं है वाली कहावत होगी। जब से यह खबर सुनी, बड़ी खुशी हुई। प्रतिभा को उचित मौका मिलेगा। मुंबई के खर्च बहुत ज्यादा हैं। कभी भी यूपी और बिहार वालों को उत्पीड़न तक झेलना पड़ता है। अचानक से कुछ हो जाता है तो डंडे तक बरसाए जाते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें