सहारनपुर। युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई गई सीएम युवा उद्यमी योजना में बैंकों की आनाकानी सामने आई है। अनेक युवा ऐसे हैं, जिन्होंने ऋण के लिए आवेदन किया, लेकिन बैंकों में ऋण देने से इन्कार कर दिया। बैंकों को डर है कि दिया गया ऋण का पैसा वापस नहीं आएगा।
योजना के तहत युवाओं को सरकारी और निजी बैंक से पांच लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज के मिलता है, जिसे चार वर्षों में जमा करना होता है। सबसे पहले आवेदक को msme.up.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद सेवा और मैन्युफैक्चरर्स क्षेत्र में अपने रोजगार की परियोजना रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें व्यवसाय का विवरण, वित्तीय योजना, बाजार विश्लेषण और जोखिम विश्लेषण देना होता है। परियोजना पास होने के बाद इसे संबंधित बैंक को प्रेषित किया जाता है।
पिछले वित्त वर्ष के आंकड़े पर नजर डाले तो 5,121 आवेदन सरकारी और निजी बैंकों में किए गए। इनमें से मात्र 97 आवेदन ही निजी बैंक द्वारा स्वीकृत किए गए। इसके बाद मौजूदा वित्त वर्ष में अभी तक निजी बैंकों के लिए मात्र 56 आवेदन किए गए। इनमें से दस को ही बैंकों द्वारा स्वीकृति दी गई है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अभी तक 2,623 आवेदन बैंकों को भेजे गए हैं। इनमें से 618 स्वीकृत हुए हैं। 583 में ऋण वितरण हो चुका है। 1,070 आवेदन को अस्वीकृत किया गया है।
- ये हैं मुख्य व्यवसाय
सीएम युवा योजना में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण, घरेलू देखभाल उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रिकल, प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य देखभाल व अन्य हैं। सेवा क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल उद्योग, स्वास्थ्य देखभाल, नवीकरणीय ऊर्जा, व्यक्तिगत देखभाल और कल्याण, टेक्सटाइल और अपैरल, सीमेंट एंड संबद्ध उत्पाद आदि शामिल हैं।
सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत स्वरोजगार के इच्छुक युवा जिला उद्योग केंद्र में आवेदन कर सकते हैं। विभाग में उद्यमी मित्र युवाओं की मदद के लिए तैनात है। सरकारी बैंकों से आसानी से ऋण उपलब्ध हो जाता है, जबकि निजी बैंकों में परेशानी आती है। ऐसे में निजी बैंकों में आवेदन भी कम हो रहे हैं।
- अजय कुमार त्रिपाठी, उपायुक्त उद्योग