सहारनपुर। हर पिता की ख्वाहिश होती है, संतान उनसे अच्छा काम कर नाम रोशन करे। प्रतिभावान संतान भी पिता के सपनों को पंख लगाने में कसर नहीं छोड़ती है, जिसका फल तब मिलता है, जब सफलता मुकाम पर पहुंची संतान से पिता की पहचान बन जाती है। सहारनपुर जिले में ऐसे कई उदाहरण हैं, जब पिता की कामयाबी को आदर्श मानकर संतान ने अपनी तरक्की का रास्ता तय किया और काबिलियत का झंडा फहरा दिया। फादर्स डे पर पेश है जिले के ऐसे ही कामयाब पिता और कामयाब संतानों पर फोकस रिपोर्ट...
गर्व है, आज बेटे से है मेरी पहचान
केंद्रीय संयुक्त सचिव (स्वास्थ्य) आईएएस लव अग्रवाल के पिता केजी अग्रवाल वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। इनका परिवार सहारनपुर में दिल्ली रोड पर ग्रीन पार्क कॉलोनी में रहता है। पिता केजी अग्रवाल बताते हैं कि लव अग्रवाल उनके सबसे बड़े बेटे हैं। इंटर की पढ़ाई सेंट मेरीज से की और फिर आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई कर 1996 बैच के आईएएस बने। केजी अग्रवाल बताते हैं कि लव अग्रवाल शुरुआती पढ़ाई से भी खुद पर भरोसा रखते थे और हर स्तर पर खुद को साबित किया। पहले ही प्रयास में आईएएस बने। मुझे गर्व है कि आज बेटे से मेरी पहचान है।
पिता के आदर्शों ने बनाया काबिल
उत्तराखंड न्यायिक विधिक अकादमी (उजाला) नैनीताल के निदेशक नितिन शर्मा सहारनपुर के जनकपुरी क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनके पिता केडी शर्मा वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। नितिन शर्मा ने सहारनपुर के एसएएम इंटर कॉलेज से इंटर तक की पढ़ाई की, फिर बीएससी और एलएलबी जेवी जैन कॉलेज से की। वर्ष 2002 में एलएलबी कर सितंबर 2003 में पहले बैच 2002 के टॉपर के रूप में उत्तराखंड न्यायिक सेवा में शामिल हुए। उत्तराखंड के कई जिलों में जज के रूप में कार्य किया। नितिन शर्मा बताते हैं, पिता के आदर्शों ने ही उन्हें काबिल बनाया है। जैसे पिता ने न्यायिक क्षेत्र में नाम कमाया, वह भी उन्हीं की तरह काबिल बनना चाहते थे और पिता के मार्गदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।
आज भी मार्गदर्शक हैं पिता
मुजफ्फरनगर में तैनात अपर जिला जज सुमित पंवार सहारनपुर के कपिल विहार निवासी हैं। उनके पिता स्वर्गीय श्यामपाल सिंह वरिष्ठ अधिवक्ता थे। पिता के आदर्श एवं सिद्धांतों को अपने जीवन में ग्रहण करके ही न्यायिक क्षेत्र में इस मुकाम तक पहुंचे। उनके पिता का निधन 2018 में हुआ था, लेकिन आज भी महसूस होता है कि जीवन के प्रत्येक कदम पर वह साथ हैं और मार्गदर्शन कर रहे हैं।
भाग्यशाली हूं, पिता के सहयोग से आगे बढ़ी
अभिनेत्री कायनात अरोड़ा ने बॉलीवुड में खूब नाम कमाया, कई फिल्मों में अभिनय किया है। उनका परिवार शहर के ज्वालानगर में रहता है। शहर के सोफिया गर्ल्स स्कूल से10वीं और सेंट मेरीज से 12 की पढ़ाई करने वाली कायनात अरोड़ा बताती हैं कि पिता मदनलाल अरोड़ा ने बचपन से साथ दिया और सहयोग किया। मैं भाग्यशाली हूं, मुझे पिता से जबरदस्त नैतिक समर्थन मिला और आत्मविश्वास भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। तभी आज इस ऊंचाई तक पहुंचीं। आज जो भी हूं, उसमें पिता का अहम योगदान है।
उनके जैसा ही चिकित्सक बनना है
यूक्रेन से एमबीबीएस (चौथा वर्ष) कर रहे केशव चंद्रा के पिता डॉ. रमेशचंद्रा एसबीडी जिला अस्पताल में सर्जन हैं। हालांकि उनकी मां मनोरमा चंद्रा और बहन भी चिकित्सक हैं। केशव बताते हैं कि उनके पिता का उन पर अलग ही प्रभाव रहा है। पिता को अपनी ड्यूटी के प्रति ईमानदारी और सेवाभाव को देखकर बचपन से इच्छा थी कि वह भी पिता के तरह डॉक्टर ही बनें। वह पिता को अपना आदर्श मानते हैं और उन्हीं की तरह चिकित्सा को केवल पेशा न समझते हुए सेवा भाव से काम करने की इच्छा रखते हैं।
पिता ने हर कदम पर दिया साथ
उत्तर-पूर्वी रेलवे में कार्यरत रितु सिंह राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी हैं, जो फिलहाल रेलवे के लिए खेलती हैं। रितु न्यू आवास विकास की रहने वाली हैं, जिनके पिता महिपाल सिंह आईटीआई में कार्यरत थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। रितु ने बताया कि उनके पिता के अनुशासन का गहरा प्रभाव रहा है। यही वजह रही है कि वह हॉकी खेलते-खेलते रेलवे की नौकरी तक पहुंचीं। उनके यहां तक पहुंचने में पिता का बड़ा योगदान रहा है। पिता को उन पर हमेशा भरोसा रहा। इसीलिए उन्हें कभी खेलने से नहीं रोका। आज पिता उन पर फख्र महसूस करते हैं, जो उसके जीवन की सबसे बड़ी कमाई है।
हमेशा जीत के लिए मिली प्रेरणा
खेल कोटे से सीआरपीएफ में कांस्टेबल की नौकरी पाने वाले रेलवे कॉलोनी निवासी वसीउल्ला खान वर्तमान में भी सीआरपीएफ की तरफ से हॉकी खेलते हैं। उनके पिता मोहम्मद जुबैर खान रेलवे में स्टेशन मास्टर रहे हैं। वसीउल्ला खान का कहना है कि ज्यादातर परिवारों में खेलकूद से अधिक पढ़ाई पर ध्यान देने का दबाव बच्चों पर रहता है, लेकिन उनके पिता ने पढ़ाई के साथ खेल में भी उनका साथ दिया। वह जहां भी खेलने के लिए जाते थे, हमेशा पिता जीतकर आने के लिए प्रेरित करते रहे। आज वह जो भी हैं उसमें पिता का सबसे बड़ा योगदान है।
- उत्तराखंड न्यायिक विधिक अकादमी के निदेशक नितिन शर्मा- फोटो : SAHARANPUR
- उत्तराखंड न्यायिक विधिक अकादमी के निदेशक नितिन शर्मा के पिता वरिष्ठ अधिवक्ता केडी शर्मा- फोटो : SAHARANPUR
- अपर जिला जज सुमित पंवार- फोटो : SAHARANPUR
- बॉलीवुड अभिनेत्री कायनात अरोड़ा अपने पिता मदनलाल अरोड़ा के साथ- फोटो : SAHARANPUR
-- रितु सिंह, हॉकी खिलाड़ी- फोटो : SAHARANPUR
-- एमबीबीएस कर रहे केशव चन्द्रा- फोटो : SAHARANPUR
-- वसीउल्ला खान, हॉकी खिलाड़ी- फोटो : SAHARANPUR