सहारनपुर। पॉलीटेक्निक से छात्राओं का मोह भंग हो रहा है। नतीजा यह है कि राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों में कहीं सीटें खाली चल रही हैं तो कहीं छात्राओं की संख्या गिनी चुनी ही है।
जनपद में दो राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान हैं। दिल्ली रोड स्थित पॉलीटेक्निक में को-एजुकेशन है। यानी छात्र और छात्राएं दोनों पढ़ते हैं। संस्थान में चार ट्रेड चलती हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, एमओएम एंड एसपी यानी मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट एंड सेक्रेट्रियल प्रैक्टिस और पीजीडीसीए शामिल हैं। सभी में 67-67 सीटें निर्धारित हैं। संस्थान सूत्रों ने बताया कि पूर्व के वर्षों में छात्राओं की संख्या लगभग छात्रों के बराबर रहती थी। कुछ समय से छात्राओं की संख्या लगातार कम हो रही है। प्रधानाचार्य विश्वास कुमार के अनुसार कंप्यूटर साइंस में 67 सीटों के सापेक्ष 62 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें छात्राओं की संख्या मात्र पांच है। इलेक्ट्रॉनिक्स में 67 सीटों के सापेक्ष 64 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें मात्र दो छात्राएं हैं। इसी प्रकार एमओएम एंड एसपी में 67 सीटों के सापेक्ष मात्र दस पंजीकरण हैं, जिनमें छात्राओं की संख्या दो ही है। इस प्रकार 136 पंजीकृत विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या मात्र नौ है। राजकीय महिला पॉलीटेक्निक गागलहेड़ी में इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस ट्रेड है। यहां दोनों में 20 से 30 फीसदी सीटें खाली हैं।
निजी संस्थान बंदी की कगार पर
जिले में 14 निजी पॉलीटेक्निक संस्थान हैं, जिनमें से पांच संस्थान ऐसे हैं, जिनमें पंजीकरण न के बराबर है। ऐसे में यह संस्थान बंदी की कगार पर हैं। बीते वर्ष इन 14 निजी पॉलीटेक्निक में कुल 3,000 सीटों के सापेक्ष मात्र 700 सीट भरी गई थी।
यह है लड़कियां कम होने की वजह
राजकीय पॉलीटेक्निक दिल्ली रोड के प्रधानाचार्य विश्वास कुमार का कहना है कि तकनीकी क्षेत्र में लड़कियां कम ही आती हैं। प्रदेश भर की पॉलीटेक्निक में यही स्थिति है। इसकी प्रमुख वजह तकनीकी क्षेत्र में सरकारी नौकरियों की कमी होना है। ऐसे में ज्यादातर लड़कियां उन क्षेत्रों को चुनती हैं।