सहारनपुर। सरकारी अस्पतालों में 17 अप्रैल से ओपीडी बंद है, जिसके बाद से इमरजेंसी वार्ड में बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। यही हाल कोविड अस्पतालों का है, जहां चिकित्सकों के साथ ही नर्सें मरीजों का बड़ा सहारा बन रही हैं। यही वजह है कि जनपद में 98 फीसदी मरीज स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। खास बात यह है कि नर्सें ड्यूटी निभाने और अपनी जिंदगी को सुरक्षित रखने के साथ ही परिवारों को भी बराबर संभाल रही हैं। कुछ नर्स ऐसी हैं, जिनके घरों में संक्रमित व्यक्ति हैं, फिर भी वह अपनी ड्यूटी को पूरी शिद्दत से अंजाम दे रही हैं। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर पेश है जिले में कार्यरत नर्सों के अनुभव पर रिपोर्ट...
- जिला महिला अस्पताल के लेबर रूम में तैनात सीनियर नर्सिंगग ऑफिसर सुनयना आलम की बेटी कोरोना संक्रमित है। पति के भी फेफड़ों में समस्या है। इसके बाद भी वह अपनी ड्यूटी का पूरी जिम्मेदारी से निर्वहन कर रही हैं। उनका दावा है कि 28 साल की नौकरी में आज तक छुट्टी नहीं ली है।
- एसबीडी जिला अस्पताल में नर्स सल्तनत खान ने अपनी जिंदगी की परवाह न करते हुए 2020 में भी कोरोना आइसोलेशन वार्ड में लगातार ड्यूटी की। दूसरी लहर में भी वह नियमित रूप से कोरोना मरीजों के इलाज में जुटी हैं। इनका कहना है कि वह अपने काम को केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि मानवता की सेवा समझती हैं।
- जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड स्टाफ नर्स राखी की ड्यूटी है। इमरजेंसी वार्ड में बीते 24 दिन से प्रतिदिन 200 से 300 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें कई कोरोना के संदिग्ध मरीज भी हैं। मगर राखी अपनी लगन और सेवा भाव से मरीजों की जिंदगी बचाने में जुटी हैं। वह खुद एक बार कोरोना संक्रमित हो चुकी हैं।
- जिला महिला अस्पताल में मनोज शर्मा नर्सिंग ऑफिसर हैं। यह खुद भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। मगर उसके बाद फिर से अपनी ड्यूटी पर लौट आए। मनोज शर्मा का कहना है कि जब मरीज ठीक होकर अपने घर लौटता है तो उन्हें बेहद अच्छा लगता है।
- जिला महिला अस्पताल में तैनात नर्सिंग ऑफिसर वेदप्रकाश का कहना है कि कोरोना काल में दुनिया को बचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी डॉक्टरों और चिकित्सकीय स्टाफ के कंधों पर है। यह अहसास उन्हें और बेहतर तरीके से अपनी ड्यूटी करने के लिए प्रेरित करता है।