सहारनपुर। पत्नी की आंखों से आंसू नहीं रुकते, बच्चे अपने पिता को याद करके तड़प रहे हैं। मां से पूछते हैं कि अब हमारा क्या होगा। कोरोना संक्रमण ने इन परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जो उन्हें जिंदगी भर सालता रहेगा। जिले के 31 शिक्षकों की कोरोना काल में मौत हो चुकी है, जिनमें सभी परिवारों का यही हाल है। शिक्षकों की मौत के कारण हंसते खेलते परिवार मातम में डूब गए हैं।
इनमें देवबंद निवासी मोहम्मद हारुन अंसारी का भी परिवार शामिल है। वह देवबंद में उच्च प्राथमिक विद्यालय इमलिया में कार्यरत थे। चुनाव ड्यूटी करने के पश्चात उनकी तबीयत खराब हुई। डाक्टर से चेकअप कराया तो ऑक्सीजन स्तर कम निकला और कोविड के लक्षण होने पर इन्हें कोविड अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। बीमारी से जूझते हुए हारुन अंसारी ने एक मई को दम तोड़ दिया। अब परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे बिलख रहे हैं।
वहीं, सरसावा क्षेत्र के गांव बिन्नाखेड़ी निवासी कुंवरपाल प्राथमिक विद्यालय सरसावा में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे। इनका निधन 10 मई को हुआ। परिवार में पत्नी किरण और आठ वर्षीय बेटा है। मासूम बेटा पिता को याद करके सुबकता रहता है तो पत्नी की आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं लेते हैं।
टीचर्स सेल्फ टीम के जिला प्रवक्ता विनय शर्मा का कहना है कि जिले में अब तक जितने भी शिक्षक शिक्षिकाओं की मौत हुई हैं, उन सभी परिवारों में यही स्थिति बनी हुई है। परिवार बेसहारा हो गए हैं, कमाने वाला कोई नहीं रहा है। इनके परिवारों के लिए सरकार को आर्थिक सहायता की व्यवस्था करनी चाहिए।