राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्थापित फेको मशीन।
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- मेडिकल कॉलेज में मोतियाबिंद के मरीजों को ऑपरेशन में नहीं लगाना पड़ेगा चीरा
- अभी मेडिकल कॉलेज में चीरा लगाकर होते थे ऑपरेशन, मरीजों को होती थी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन आधुनिक फेको मशीन से शुरू हो गए हैं। इसमें मरीजों को चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। दूरबीन के माध्यम से ऑपरेशन होते हैं। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
मोतियाबिंद से परेशान मरीजों को अभी ऑपरेशन कराने के लिए दिक्कतें झेलनी पड़ती थीं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के लिए पुराने तौर-तरीकों को आजमाया जाता था। आंख को सुन्न करने के बाद चीरा और टांका लगाकर मरीजों का राहत दी जाती थी। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद हर विभाग को अपडेट करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी कड़ी में नेत्र रोग विभाग में सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।
प्राचार्य डॉ. सुधीर राठी ने मरीजों को राहत देने के लिए आधुनिक फेको मशीन उपलब्ध कराई है। मशीन लगने से सुन्न करने के लिए इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं हो रही। चीरा व टांकों की आवश्यकता भी नहीं होती है। उन्होंने बताया कि फेको मशीन आने के बाद छोटे से छेद के माध्यम से दूरबीन के जरिये मरीज का सफल ऑपरेशन कर दिया जाता है। अभी ऑपरेशन निशुल्क किए जा रहे हैं। जब 20 से 30 ऑपरेशन हो जाएंगे। उसके बाद ही शुल्क तय होगा। इस मशीन को चलाने के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज में स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिलाया जा रहा है।
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यह हैं मोतियाबिंद के लक्षण
- कम दिखाई देना
- आंख से धुंधला दिखना
- दोहरा या डबल दिखाई देना।
- चमकीले गोले भी दिखाई देने लगते हैं।