सुदेश के मुताबिक उन्होंने ऐसा कछुआ कभी पहले नहीं देखा था। इसके बाद मौके पर ग्रामीण जमा हो गए। सुदेश ने कछुए को गूगल पर जाकर सर्च किया तो वह इंडियन स्टार प्रजाति का मिला, जो आम तौर पर भारत के साथ ही पाकिस्तान और श्रीलंका में पाया जाता है। गूगल से पता चला है कि इस कछुए की प्रजाति विलुप्त हो रही है। दो दिन से रकम और सुदेश वन विभाग से संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे।
मंगलवार को उनका डीएफओ विजय सिंह से संपर्क हुआ। विजय कुमार ने उन्हें रेंजर से मिलने को कहा। इसके बाद रकम और सुदेश ने कैलाशपुर जाकर कछुआ रेंजर अरुण के सुपुर्द किया। सुदेश ने बताया कि कुछ लोगों ने बीमारी ठीक करने के लिए कछुए को उनसे खरीदने की कोशिश की, मगर उन्होंने बेचा नहीं तथा कछुए को बचाने के लिए उसे कहीं छोड़ने की बजाय वन विभाग सौंपना बेहतर समझा।