सहारनपुर। वुड कार्विंग निर्यातकों को कंटेनर समय पर नहीं मिलने के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है। विदेश भेजे जाने वाले माल की समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे खरीदार भी नाराजगी जता रहे हैं। वुड कार्विंग निर्यातक चाहते हैं कि केंद्र सरकार कंटेनर की उपलब्धता सुनिश्चित कराए, ताकि कारोबार अच्छी तरह चलता रहे।
कोरोना काल में वैसे ही कारोबार पर बुरा असर पड़ा, अब कंटेनर उपलब्ध न होने के कारण वुड कार्विंग कारोबारी परेशानी में पड़ गए हैं। यहां के वुड कार्विंग कारोबारियों को अपने उत्पाद विदेश भेजने के लिए दादरी, मुरादाबाद, दिल्ली, पानीपत अथवा बल्लभगढ़ (हरियाणा) से कंटेनर लेने पड़ते हैं, लेकिन कंटेनर की बुकिंग के 10 बाद भी उपलब्धता नहीं हो पाती है। ऐसे में उत्पाद विदेश भेजने में देरी हो रही है। जिले से वुड कार्विंग कारोबार की ही बात करें, तो करीब 200 से ज्यादा कंटेनर प्रतिमाह की जरूरत होती है। इसके अलावा भी कई कंपनियां हैं, जिन्हें माल विदेश भेजने के लिए कंटेनरों की आवश्यकता होती है।
200 से ज्यादा हैं निर्यातक
सहारनपुर का वुडकार्विंग उद्योग करीब सौ साल पुराना है। यहां 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय निर्यातक हैं। करीब 1300 मैन्युफैक्चर्स और एक लाख से अधिक कारीगर जुड़े हैं। वुड कार्विंग कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब एक हजार करोड़ रुपये का है। सहारनपुर से अमेरिका और यूरोप में 35-35 फीसदी निर्यात किया जाता है, जबकि बाकी सामान एशिया के देशों में जाता है।
वुड कार्विंग निर्यातक एवं आईआईए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामजी सुनेजा का कहना है कि पहले सहारनपुर में ही जनता रोड पर इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) था, जो करीब 25 साल तक चला। यहां से कंटेनर आसानी से मिल जाता था। अब एक्सपोर्ट तो बढ़ गया, लेकिन आईसीडी खत्म कर दिया गया। अब दादरी, मुरादाबाद, दिल्ली अथवा पानीपत के पास से कंटेनर लेना पड़ता है।
वुड कार्विंग निर्यातक एवं आईआईए के चैप्टर चेयरमैन रविंद्र मिगलानी का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए। क्योंकि कंटेनर समय पर नहीं मिलने के कारण उद्यमियों को बड़ा नुकसान हो रहा है। एक तो समय पर सामान नहीं पहुंच रहा, यदि जल्दी सामान भिजवाना है तो अतिरिक्त खर्च करके कंटेनर लेने को मजबूर होना पड़ता है।
वुड कार्विंग निर्यातक ओसाफ गुड्डूू का कहना है कि कंटेनर की बुकिंग के आठ से 10 दिन बाद कंटेनर की उपलब्धता हो पा रही है। वह यूके और यूएसए में माल भेजते हैं। कंटेनर मिलने की वजह आयात कम होना भी है। सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए।
सहारनपुर वुड कार्विंग मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शेख फैजान अहमद का कहना है कि कंटेनर की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। कई बार तो खराब हालत वाला कंटेनर मिलता है, जिसे कारोबारी को खुद ही ठीक करवाने का खर्च तक उठाना पड़ जाता है।
वुडकार्विंग कारोबार और निर्यात की सालाना स्थिति
- वुडकार्विंग का कुल कारोबार 1400 से 1500 करोड़ रुपये
- वुडकार्विंग का कुल निर्यात 900 से 1000 करोड़ रुपये
- अमेरिका के राज्यों में निर्यात 400 से 500 करोड़ रुपये
- आस्ट्रेलिया में निर्यात 100 से 150 करोड़ रुपये
- जर्मनी में निर्यात 150 से 160 करोड़ रुपये
- स्पेन में निर्यात 100 से 150 करोड़ रुपये
- वुड़ कार्विंग निर्यातक एवं आईआईए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामजी सुनेजा- फोटो : SAHARANPUR
- रविंद्र मिगलानी, वुड कार्विंग निर्यातक एवं आईआईए चैप्टर चेयरमैन।- फोटो : SAHARANPUR
- औसाफ गुड्डू, वुड कार्विंग कारोबारी एवं निर्यातक- फोटो : SAHARANPUR
- शेख फैजान अहमद, अध्यक्ष, सहारनपुर वुड कार्विंग मैन्युफेक्चर्स एसोसिएशन- फोटो : SAHARANPUR