सड़कें बन गईं ट्रैक, ऑनलाइन चल रहा जूडो प्रशिक्षण
सहारनपुर। कोरोना काल में स्टेडियम बंद होने के बाद एथलेटिक्स खिलाड़ी खासकर धावक परेशान हैं। प्रैक्टिस जारी रखने के लिए वह हाईवे और गांवों की सड़कों का इस्तेमाल ट्रैक के रूप में कर रहे हैं। हालांकि एथलेटिक्स में कई स्पर्धाएं ऐसी भी हैं, जिनके प्रशिक्षण के लिए खुला मैदान होना जरूरी है। ऐसे खेलों के प्रशिक्षण बाधित हो रहे हैं। उधर, योगा, जूडो और कुश्ती के खिलाड़ियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनके अलावा कई खेल ऐसे हैं, जिनका प्रशिक्षण पूरी तरह बंद है। खेल और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण को लेकर प्रस्तुत है एक रिपोर्ट।
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बोले एथलीट
- अंतरराष्ट्रीय एथलीट रामशरण 27 साल से दौड़ में हिस्सा ले रहे हैं। अभी तक वह पांच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं। चूंकि सुबह दौड़ना उनकी आदत में शामिल है। ऐसे में कोरोना काल में भी वह सुबह-सुबह दौड़ने निकल जाते हैं। स्टेडियम बंद होने के बाद वह प्रशिक्षण जारी रखने के लिए हाईवे पर प्रतिदिन दस से 12 किलोमीटर की दौड़ लगा रहे हैं।
- प्रिंस कुमार पांच राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। खेलो इंडिया प्रतियोगिता में वह सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। कोरोना की वजह से स्टेडियम बंद है। ऐसे में वह अपने गांव जगैता में ही प्रशिक्षण जारी रखे हैं। प्रिंस ने बताया कि किसी भी खिलाड़ी के लिए प्रशिक्षण में लंबा ब्रेक लेना ठीक नहीं है। ऐसे में वह और उनके साथी अपने स्तर से प्रशिक्षण जारी रखे हुए हैं।
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ऑनलाइन चल रहा प्रशिक्षण
जिला जूडो संघ के संस्थापक सचिव दीपक गुप्ता अंतरराष्ट्रीय रेफरी भी हैं। वह खिलाड़ियों को वर्षों से प्रशिक्षित करते आ रहे हैं। कोरोना काल में प्रशिक्षण बंद होने के बाद उन्होंने एक एप के जरिए प्रशिक्षण जारी रखने का रास्ता निकाला। बीते करीब पांच माह से वह एप के माध्यम से ही खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। करीब 70 खिलाड़ी नियमित रूप से ऑनलाइन प्रशिक्षण पा रहे हैं। वह योगा भी ऑनलाइन ही करा रहे हैं।
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इन खेलों के प्रशिक्षण हुए बंद
डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट मैदान के साथ ही नेट प्रेक्टिस के लिए भी अच्छी व्यवस्था है। स्टेडियम बंद होने के बाद ज्यादातर खिलाड़ियों का प्रशिक्षण बंद है। हालांकि एक निजी एकेडमी ने करीब 15 दिन पहले प्रशिक्षण शुरू किया है। हॉकी और फुटबॉल की भी यही स्थिति है। लॉन टेनिस, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और टेबिल टेनिस आदि का प्रशिक्षण भी पूरी तरह बंद ही है।
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जंगल बन गया स्टेडियम
डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोरोना से पहले से ही सिंथेटिक ट्रैक बिछाने का कार्य चल रहा है। इस वजह से मैदान खोदा हुआ है। ट्रैक बिछाने का कार्य भी बंद होने से मैदान पर बड़ी घास उग आई है। बॉक्ंिसग रिंग का बेस भी धूल फांक रहा है। लॉन टेनिस मैदान भी गंदा पड़ा है। क्रिकेट पिच और नेट प्रैक्टिस के लिए बनी पिचों पर घास उग आई है।
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जूडो हॉल पर लटका है ताला
डॉ. आंबेडकर स्टेडियम में जूडो छात्रावास भी है। जहां प्रदेश भर के खिलाड़ी रहकर प्रशिक्षण पाते हैं। कोरोना के कारण स्टेडियम बंद होने के साथ ही छात्रावास भी बंद पड़ा है। सभी खिलाड़ी महीनों से अपने घरों पर गए हुए हैं। ऐसे में स्टेडियम में जूडो प्रशिक्षण भी बंद है।
- वर्जन ---
कोरोना के चलते स्टेडियम अभी बंद ही है। कुछ खेलों के खिलाड़ी अपने स्तर पर अपने घरों, गांवों और पार्कों में प्रशिक्षण जारी रखे हुए हैं। सभी से यही अपील है कि स्टेडियम खुलने का इंतजार करें। यदि कहीं बाहर प्रशिक्षण जारी रखे हुए हैं तो कोविड-19 से बचने के लिए सभी सावधानियां बरतें।
- प्रेम कुमार, प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी।