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खाली पुलिस चौकियां और पिकेट भी नदारद

Tue, 02 May 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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खाली पड़ी पुलिस चौकी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर शहर और जिले की पुलिसिंग को मजबूत करने के दावे तो बहुत किए गए,  लेकिन न तो हालात बदले और न ही पुलिस। हालत यह है कि दिन में भी अधिकतर पुलिस चौकियां खाली रहती हैं। 
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चौकियों तथा चेक पोस्टों को राम भरोसे छोड़ दिया गया है। ऐसा तब है जब शहर में चोरी, मारपीट, चेन स्नेचिंग, छेड़छाड़ की घटनाएं ही नहीं हो रहीं बल्कि छोटे-छोटे विवाद उग्र रूप धारण कर रहे हैं।

 इन चौकियों एवं चेक पोस्टों का हाल दिन में ही ऐसा है, जहां या तो ताला लगा हुआ है, या फिर उन्हें खुला छोड़कर सभी आराम फरमाने चले गए हैं। अमर उजाला टीम ने सोमवार को दिन में ही इन चौकियों एवं चेक पोस्ट का हाल देखा
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उधर, शहर में 31 चौकियां हैं, लगभग सभी पर पुलिसकर्मी और चौकी इंचार्ज तैनात हैं, लेकिन सब दिखावा मात्र रह गए हैं। इन    चौकियों पर कोई विशेष परिस्थिति  में ही जाता है।

कई चौकियां तो  शहर में ऐसी हैं, जिन पर न पानी  का   इंतजाम है और न ही शिकायतकर्ताओं के बैठने की व्यवस्था है। शहर के बीचों बीच स्थित घंटाघर पुलिस चौकी पर न तो पीने के पानी की कोई व्यवस्था है और न ही कोई अन्य व्यवस्था है।

कुतुबशेर चौकी पर तो बैठने तक की व्यवस्था नहीं है, मल्हीपुर रोड, निर्यात निगम पर भी यही स्थिति है। डीआईजी जितेंद्र कुमार शाही के अनुसार सोमवार को बैंकों की ड्यूटियां होती हैं।

हो सकता है कि पुलिस चौकी के सिपाहियों एवं अधिकारियों को ड्यूटी पर लगाया गया हो, लेकिन यह सभी पर लागू नहीं है। चौकी पर वायरलेस सेट होता है, असलाह भी होता है। चौकी पर एक न एक कर्मचारी को होना चाहिए। इसकी जांच कराई जाएगी। कोई लापरवाही मिली तो उस पर कार्रवाई होगी।   

निर्यात निगम पुलिस चौकी, मंडी रोड , अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची तो चौकी पूरी तरह से खाली थी। चार कुर्सियां जरूर पड़ी हुई थीं, लेकिन न चौकी पर ही कोई मौजूद था और न ही आसपास कोई पुलिसकर्मी मौजूद था।

जबकि यह पुलिस चौकी इतनी संवेदनशील है कि यहां आए दिन झगड़े होते रहते हैं। हाल में ही वुड कार्विंग का माल यहां से निकलते ही गायब हो गया था। पास की बूचड़खाना है, जहां से अवैध कटान कर मीट ले जाते हुए कई बार पकड़ा गया है। हाल में ही विश्वकर्मा चौक पर पकड़ा गया था। क्योंकि इस चौकी पर कोई रहता ही नहीं है, तो चैक कौन करे

कुतुबशेर पुलिस सहायता केंद्र, चौकी चौक,  सबसे संवेदनशील जगह पर बनी इस पुलिस चौकी पर दोपहर साढ़े 12 बजे तक कोई मौजूद नहीं मिला। लोहे का दरवाजा खुला हुआ था और शीशे का दरवाजा बंद था।

जब अमर उजाला टीम वहां पहुंची तो पास से ही एक दुकानदार वहां आया और बोला कि क्या काम है। चौकी इंचार्ज से मिलना है तो बोर्ड पर लिखा फोन नंबर मिलाओ और बात कर लो। यहां तो पता नहीं कब आएंगे।

जबकि इस चौकी के पास हाल में ही दो बार बच्चों को पीटने पर बवाल हो चुका है। जिसमें एक बार तो पुलिस पर ही आरोप लगाया गया था। उसके बावजूद यहां पर पूरी लापरवाही बरती जा रही है।    

गंगोह रोड, पुलिस चेक पोस्ट,  अमर उजाला की टीम जब गंगोह रोड स्थित चेक पोस्ट पर पहुंची तो वहां पर भी कोई नहीं मिला। खाली कुर्सियां पड़ी हुई थीं। शहर के प्रवेश द्वार पर मौजूद यह चौकी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यहां पर सर्किट हाउस है, लेबर कोर्ट है, लेबर कालोनी है।

लेबर कालोनी में छोटी-छोटी बात पर कई बार हंगामा हो चुका है। लोगों को चौकी पर हर बार ही कोई नहीं मिला और लोग थाना कुतुबशेर पर पहुंचते हैं। इस चौकी के ठीक सामने ही बैंक मैनेजर से बदमाशों ने लूट की घटना को अंजाम दिया था। उस समय भी इस चौकी पर कोई मौजूद नहीं था।      
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