सहारनपुर। निजीकरण की नीतियों के विरोध और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर विद्युत कर्मचारियों ने सांकेतिक कार्य बहिष्कार किया और प्रदर्शन कर धरना दिया। उन्होंने कहा कि निजीकरण का प्रयोग अब तक जहां भी हुआ है, वह विफल रहा है। निजीकरण नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे विद्युत कर्मियों में आक्रोश है।
बुधवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सहायक अभियंता सुरेंद्र भंडारी के नेतृत्व में विद्युत कर्मी घंटाघर के पास स्थित विद्युत निगम के दफ्तर में एकत्र हुए। उन्होंने पूर्वाह्न 10 से सायं पांच बजे तक विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिशासी अभियंता राजीव भट्ट ने कहा निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा, ग्रेटर नोएडा और आगरा में विफल रहा है, फिर भी केंद्र सरकार ने बिजली के निजीकरण के लिए इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2020 एवं स्टैंडर्ड बिडिंग डाक्युमेंट जारी किया, इससे विद्युत कर्मियों में आक्रोश है। इंजीनियर राकेश कुमार यादव ने बताया निजी क्षेत्र की अपेक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के अधिक आर्थिक, सामाजिक लाभ हैं। संविधान में सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय की संकल्पना की है। सैद्धांतिक तौर पर इन विचारों का निजीकरण की प्रक्रिया से मतभेद होता है।
अनिल कुमार ने बताया निजीकरण के बाद कंपनियों की विशुद्ध परिसंपत्ति का प्रयोग सार्वजनिक कार्यों और जनसामान्य के लिए नहीं किया जा सकेगा। निजीकरण की प्रक्रिया बड़े पैमाने पर प्रबंधन की परिवर्तन होने वाली कार्य संस्कृति से उपभोक्ता भयभीत हैं। नवीन कुमार सैनी ने कहा प्रदेश में तीन करोड़ उपभोक्ता है, उनके सापेक्ष कार्मिक मात्र 35 हजार हैं। यानी एक हजार उपभोक्ता पर 1.16 कार्मिक हैं, जबकि देश का मानक एक हजार उपभोक्ता पर 2.65 कर्मिक का है। रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती की जानी चाहिए। इसके अलावा विद्युत (संशोधन) बिल 2020 और स्टैंडर्ड बिडिंग डाक्युमेंट वापस लेना चाहिए। इसमें एके शर्मा, अनिल कुमार शीना, रवि कुमार, अजय कनौजिया, वसीम, नितिन, पंकज, अरुण कुमार, नवल कुमार, केपी यादव, राजन कुमार, अरविंद सिंह रावत, आशीष खरे, महेंद्र प्रताप सिंह और मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।