उन्होंने कहा कि जब महाराणा प्रताप और महाराणा सांगा की बात होती है तो स्वदेश और स्वाभिवान याद आने लगता था। महाराणा ने कहा था कि हमारी लड़ाई सत्ता की नहीं स्वाभिमान की है। उन्होंने कहा कि किसी आक्रांता के सामने राणा कभी सिर नहीं झुका सकता है। उसके खिलाफ वे लड़ते रहे। जंगल में जाकर घास की रोटी खाई लेकिन विदेशी हकुमत के सामने सिर नहीं झुकाया। कभी सत्ता के लिए समर्पण नहीं किया।
उन्होंने कहा कि उस समय की बड़ी शासक ताकत के रूप में अकबर जाना जाता था, जिसे उन्होंने नाकों चने चबाने को मजबूर कर दिया था। उन्होंने उन लोगों के साथ बैठना तक उचित नहीं समझा जो स्वदेश के खिलाफ आचरण कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यही कारण है कि सैकडों वर्षों के बाद भी यह देश महाराणा प्रताप को देश और धर्म पर त्याग के लिए याद करता है। देश और धर्म के लिए जो भी समर्पण करेगा उसे समाज और राष्ट्र सदैव याद करेगा। आजादी के बाद अनेक सरकारें देखी। यह 18वीं लोकसभा का का चुनाव है। पीएम मोदी से पहले जो भी सरकारें आईं वे उनसे पूछना चाहते हैं कि क्या अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण वे कर पाते। कांग्रेस ने उच्च्तम न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल किया था कि राम हुए ही नहीं है। हनुमान जी जब संजीवनी बूटी तलाश करने गए थे तो कालनेमी भी राम नाम का जप कर रहा था। याद रखना कालनेमी आएंगे राम नाम का जप करेंगे। बिकने वाले लोग भी बिकने की कतार में खड़े हाेंगे लेकिन, सच्चा राष्ट्र भक्त उसके साथ खड़ा होगा जो राम को लाए हैं। हम उसको लाएंगे। उन्होंने भीड़ से पूछा कि सहमत हो ना।
उन्होंने कहा कि चुनाव दो ध्रुवीकरण का है। एक तरफ जातिवादी हैं तो दूसरी तरफ राष्ट्रवाद के लोग हैं। एक तरफ तुष्टिकरण की नीति पर चलने वाले हैं तो दूसरी तरफ भारत माता का सम्मान ऊंचा रखने वाले हैं। एक तरफ अपने परिवार और जाति तक सीमित रहने वाले लोग हैं। जब सत्ता बनती है तो सत्ता को माफिया के हवाले करके सामान्य नागरिक को रौंदने के लिए छोड़ दिया जाता है। बेटी और व्यापारी की सुरक्षा खतरे में डाल दी जाती है। गो-तस्करों को आस्था के साथ खिलवाड़ करने की छूट दी जाती है। दूसरी तरफ आपने दस सालों में केंद्र और सात सालों में प्रदेश की सरकार को भी देखा है। सरकार कैसे बिना डरे, बिना झुके चलती है।
यूपी के लोग दंगा करना और पत्थरबाजी भूल गए हैं। पहले पश्चिमी यूपी में त्योहारों पर कर्फ्यू लग जाता था। अब धूम धड़ाके साथ कांवड़ यात्रा निकलती है। पहले जहां से चिल्लाहट होकर लोग उपद्रव करते थे, वहां हमने सभी माइक ही उतार दिए हैं। ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसूरी। सारा विवाद ही समाप्त कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने हनुमान चालिसा की चौपाई बल बुद्वि विद्या देऊ मोहि हरेऊ क्लेश विकार का उल्लेख करते हए कहा कि जातिवाद और क्षेत्रवाद का क्लेश हरा डालिए। अपना जनार्धन स्वरूप दिखा कर बोलिए जो राम को लाए हैं जो कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए हैं हम उनको लाएंगे। जिन्होंने तीन तलाक की कुप्रथा को समाप्त किया है हम उन्हें लाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस, सपा और बसपा ने जिले को क्या दिया है। सहारनपुर और शामली सड़क को रोक दिया गया था, क्योंकि ठेकेदार ने कमीशन नहीं दिया था। भाजपा ने दिल्ली से देहरादून की दूरी को दो घंटे का कर दिया है।
उन्होंने कहा कि देवबंद को मजहबी जुनून का अखाड़ा बना दिया था। थोड़ी सी बात को लेकर फतवा जारी हो जाता था। जिस सहारनपुर को शिक्षा के पवित्र केंद्र के रूप में पश्चिम का काशी बनना था उसको अराजकता और भय फैलाने के लिए मजहबी जुनून का अड्डा बना दिया गया है। वैक्सीन भी कैसे दी जाएगी यह फतवे से तय होगा। यह डॉक्टर तय करेंगे। यहां विकास की चर्चा नहीं होती थी। हमने हाईवे बनाए, विश्वविद्यालय बनाया और सहारनपुर को स्मार्ट सिटी बनाया जा रहा है। मां शाकंभरी के नाम पर विश्व स्तरीय यूनिवर्सिटी बनाई जा रही है। चुनाव के बाद हम भव्य उद्घाटन के लिए आएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की व्यवस्था को माफिया नहीं संचालित कर पाएगा। माफिया वहीं जाएगा जहां उसकी जगह है। सीएम ने कहा कि कोई समझौता नहीं करेंगे। अगर कोई बेटी और व्यापारी की सुरक्षा पर खतरा बनेगा तो पहले से तय कर दिया गया कि उसे मिट्टी भी नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि कोई जेल में है कोई जहन्नुम में हैं और जो बाकि बचे हैं स्वयं ही राम नाम सत्य की यात्रा पर निकल गए हैं। बड़े-बड़े धुरंधर हुआ करते थे। सपा के लोग दुम दमा कर चलते थे। सरकार बदलने पर उन माफिया की गर्मी को शांत कर दिया गया है। जिनकी गर्मी शांत हो गई उनको ये जातिवादी संगठन फिर से पैदा करने का काम कर रहे हैं। ये रक्तबीज है।