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साढ़े आठ लाख पशुओं का होगा टीकाकरण

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सहारनपुर। खुरपका और मुंहपका रोग से बचाव के लिए पशुओं को टीका लगाने के लिए पशुपालन विभाग ने प्लान तैयार कर लिया है। इसके तहत जनपद के 11 विकासखंड और शहरी क्षेत्र में साढे़ आठ लाख पशुओं को टीके लगाए जाएंगे। खुरपका और मुंहपका रोग को देखते हुए शासन के निर्देशानुसार इस बार साढ़े आठ लाख वैक्सीन पशुपालन विभाग को मिलेंगी। एक अप्रैल से विभाग की ओर से अभियान शुरू किया जाएगा।
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बरसात के मौसम में पशुओं में खुरपका और मुंहपका रोग होने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ जाती हैं। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष ज्यादा पशुओं को टीके लगाए जाएंगे। बीते वर्ष साथ लाख पशुओं का टीकाकरण हुआ था। इसके लिए विभाग की ओर से सर्वे कर पंजीकरण किया गया था, लेकिन इस बार साढ़े आठ लाख पशुओं का पंजीकरण हुआ है। विभाग की टीमें एक अप्रैल से अभियान की शुरूआत करेंगी।
लगेगा मंडल स्तरीय पशु मेला
पशुपालन विभाग की ओर से जनपद में मंडल स्तरीय पशु मेला लगाया जाएगा। जिसमें शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के पशुपालक शामिल होंगे और बाहर से आण् पशु चिकित्सक पशुओं में होने वाली बीमारियों से बचाव की जानकारी देंगे। 20 मार्च के बाद पशु मेला लगेगा।
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एक अप्रैल से शुरू होगा पूरा अभियान
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी बीएस शर्मा ने बताया कि एक अप्रैल से टीकाकरण अभियान की शुरुआत होगी। इससे पूर्व मंडल स्तरीय पशु मेला भी सहारनपुर में लगाया जाएगा।
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पशुओं में रोग के लक्षण और बचाव
रोग के लक्षण
- पशु के मुंह से अत्यधिक लार का टपकना
- जीभ और तलवे पर छालों का उभरना एवं जीभ का बाहर आ जाना
- पशु के जुगाली करना बंद कर देना
- दूध उत्पादन में करीब 80 प्रतिशत की कमी।
- पशुओं का गर्भपात होना
- बछड़ों में अत्यधिक बुखार आने पर मृत्यु हो जाना।
ऐसे करें बचाव
- रोग का पता लगने पर पशु को अन्य पशुओं से तुरंत दूर किया जाए
- दूध निकालने वाले व्यक्ति को हाथ और मुंह साबुन से धोना चाहिए
- प्रभावित क्षेत्र को सोडियम कार्बोनेट घोल पानी मिलाकर धोना चाहिए
- चिकित्सकों की सलाह लेकर पशु के तुरंत टीका लगवाने के साथ नियमित उपचार कराएं।
- बीमार पशुओं को स्पर्श करने के बाद व्यक्ति को सोडियम कार्बोनेट घोल से अपने हाथ पैर धोने चाहिए। क्योंकि, यह रोग मनुष्य भी फैल सकता है।
- जिस जगह पर पशु को रखते हों, वहां ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें।
- टीकाकरण के दौरान प्रत्येक पशु के लिए अलग-अलग सुई का प्रयोग कराया जाए।
- पशु के ठीक हो जाने पर 20 दिन बाद ही उसे दूसरे पशुओं के पास लाना चाहिए।
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