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जागरूकता के अभाव में गर्भवती हो रहीं कुपोषण का शिकार

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सहारनपुर। जागरूकता का अभाव, खानपान में लापरवाही और योजनाओं के क्रियान्वयन में बरती जा रही ढील के कारण कुपोषण खत्म नहीं हो पा रहा है। खास बात यह है कि गर्भवती की जांच में हीमोग्लोबिन की कमी आ रही है, जो करीब 30 प्रतिशत तक गर्भवती में है। इससे कमजोरी आती है और गर्भवती कुपोषण की जद में आ जाती हैं। बाल विकास एवं पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी की बावजूद में जिले में गर्भवती कुपोषण का शिकार हो रही हैं।
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जनपद में वर्तमान में 33762 गर्भवती और 30 हजार धात्री महिलाएं हैं, जिनकी निगरानी 3410 आंगनबाड़ी केंद्र से कराए जाने की व्यवस्था है। इनमें 30 प्रतिशत महिलाओं में बीते दिनों हुई जांच में खून (हीमोग्लोबिन) की कमी पाई गई। यह स्थिति तब है, जब प्रत्येक माह पुष्टाहार और आयरन की गोलियां बांटने का दावा किया जाता है।
वहीं, विभिन्न कार्यक्रम होने के बावजूद जागरूकता का अभाव सामने आया है। महिलाएं समय पर जांच नहीं कराती, जिससे उन्हें यह तक पता नहीं चलता कि हीमोग्लोबिन कितना है, जबकि चिकित्सक कहते हैं कि गर्भवती में 11 प्रतिशत हीमोग्लोबिन सामान्य माना जाता है, इसलिए यह इससे ज्यादा ही होना चाहिए। गर्भवती और उनके परिजन समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं, जिसकी वजह से महिलाएं कुपोषण का शिकार होती हैं।
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स्टाफ की कमी से होती हैं परेशान
सरकड़ी निवासी गर्भवती रेेनू, बड़गांव निवासी हीना, चकआदमपुर निवासी इमराना का कहना है कि हर माह दवाएं एवं पोषाहार मिलता है, लेकिन महिला चिकित्सालय और सीएचसी व पीएचसी में इलाज कराने में कई दिक्कतों का सामने करना पड़ता है। कई बार डाक्टर नहीं मिलते तो कई जगहों पर स्टाफ की भी कमी बताई जाती है।
पोषाहार में शामिल सामान
स्वयं सहायता समूहों की ओर से कोटेदार के यहां से प्रत्येक गर्भवती को एक किलो दाल, दो किलो चावल, दो किलो गेहूं और साढ़े चार लीटर सोया ऑयल प्रतिमाह दिया जाता है। वहीं, आंगनबाड़ियों और स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाएं दी जाती है। इसके बाद भी महिलाओं में खून की कमी बनी है।
इन पदार्थों के सेवन की दी जाती है सलाह
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी का कहना है कि गर्भवती और धात्री महिलाओं की निगरानी की जा रही है। योजनाओं का लाभ दिया जाता है। जागरूकता कार्यक्रम में गर्भवती और उनके परिजन नहीं आते हैं। इस वजह से भी दिक्कत होती है। गर्भवती और धात्री महिलाओं को दाल, दूध, हरी सब्जी, अंडा, दालें, अंकुरित अनाज, बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियां आदि देने की सलाह दी जाती है। वर्तमान में चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह के तहत पोषण वाटिकाओं का भी निर्माण कराया जा रहा है।
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