बादशाही बाग स्थित जल निगम की परियोजना पर धरना प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद
मिर्जापुर। बादशाही बाग पेयजल परियोजना की मोटर फुंकने से पिछले 15 दिनों से तीनों गांवों की पांच हजार की आबादी पानी की बूंद-बूंद को तरस रही है। गर्मी में पेयजल किल्लत से परेशान ग्रामीणों ने मंगलवार को योजना पर धरना प्रदर्शन किया। धरने की सूचना के बाद भी जल निगम का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
जल निगम की बादशाही बाग परियोजना का निर्माण लगभग 40 वर्ष पहले हुआ था। इस परियोजना से बादशाही बाग, गंजीपुर और शफीपुर गांव को पेयजल आपूर्ति की जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना पर हर माह कोई न कोई तकनीकी खराबी आ जाती है। गर्मी शुरू होते ही यह परियोजना पूरी तरह जवाब दे जाती है। परियोजना पर लगे 6 इंच फोर्स के ट्यूबवेल की मोटर पिछले 8 साल से तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़ी है। गांव वालों की प्यास बुझाने वाला एकमात्र 4 इंच फोर्स का ट्यूबवेल भी 15 दिन पहले मोटर फुंकने से बंद हो गया। हाल ही में नई मोटर डाली गई थी वह भी फुंक गई। आरोप है कि निगम अधिकारियों से बात करने पर उनका कहना है कि ग्रामीण स्वयं पैसा इकट्ठा करके मोटर ठीक कराएं।
ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारी पांच साल पहले परियोजना से स्टैबलाइजर उतारकर ले गए थे जिसे आज तक वापस नहीं भेजा गया। लाखों रुपये की लागत से लगा सौर ऊर्जा प्लांट भी सिर्फ शोपीस बना है। पानी न मिलने से ग्रामीण दूर-दराज से महंगे दामों पर टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान महावीर सिंह एवं पूर्व प्रधान शफीपुर अशोक राणा ने कहा कि 15 दिन से गांव में हाहाकार मचा है, लेकिन जल निगम के अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। धरने पर बैठने वालों में खालिद, पूर्व प्रधान अशोक राणा, दिनेश गुप्ता, महावीर सिंह प्रधान, सोनू, दिनेश पंवार, प्रमोद, धर्मपाल, नसीम, आत्माराम, सलीम आदि शामिल रहे। उधर, जल निगम के एसडीओ योगेश कुमार ने बताया कि दोबारा फाल्ट आने की जानकारी नहीं है। जल्द ही खराबी दूर कराई जाएगी।