सहारनपुर। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की ड्रेस का पैसा इस बार लखनऊ से सीधे उनके अभिभावकों के खातों में भेजा जाएगा। प्रत्येक विद्यार्थी की दो ड्रेस के लिए 600 रुपये मिलेंगे। जिले भर में इन विद्यार्थियों की संख्या 1,92,180 (एक लाख 92 हजार 180) है, जिनकी ड्रेस पर 11,53,08000 (11 करोड़ 53 लाख 8000) रुपये का खर्च आएगा।
डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) और पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत सरकार ने इस बार ड्रेस का पैैसा अभिभावकों के खातों में भेजने का निर्णय लिया है। शिक्षकों को प्रेरणा पोर्टल के ऊपर बच्चे की डिटेल जैसे नाम, पिता का नाम, खाताधारक का नाम, खाता संख्या, बैंक का नाम, आईएफएससी कोड आदि सत्यापित कर खंड शिक्षा अधिकारी को भेजने हैं। खंड शिक्षा अधिकारी उसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे, जहां से पूरी डिटेल लखनऊ भेजी जानी है। वहां से पैसा सीधे मां या पिता के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। बच्चे की डिटेल इकट्ठा करने के लिए 15 जुलाई तक का समय निर्धारित किया गया है। शिक्षकों को डिटेल भरते समय यह ध्यान रखना है कि बच्चे, माता-पिता या किसी अन्य अभिभावक के नाम की स्पेलिंग में किसी प्रकार की त्रुटि न हो। अभी तक ड्रेस का पैसा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पास आता था, जहां से पैसा एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) को भेजा जाता था। प्रधान अध्यापक उक्त पैसे को निकालकर पंजीकृत विद्यार्थियों को रेडीमेड ड्रेस उपलब्ध कराते थे।
एकल होना चाहिए खाता
ड्रेस का लाभ लेने के लिए बच्चे के माता या पिता का एकल खाता होना चाहिए यानी वह ज्वाइंट न हो। यदि मां और पिता नहीं हैं तो वह अपने दादा, दादी, चाचा, ताऊ, बुआ, फूफा आदि किसी का भी खाता नंबर दे सकता है, मगर उक्त व्यक्ति का नाम बच्चे के प्रवेश रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए, साथ ही खाता अपडेट होना चाहिए, जिसमें जून माह में कोई लेनदेन हुआ हो। ऐसा न हो, जो काफी समय से बंद पड़ा हो या लेनदेन न हो रहा हो।
यह हो सकती है समस्या
पूर्व की व्यवस्था में प्रधान अध्यापक किसी एक डीलर से ड्रेस खरीदकर बच्चों को उपलब्ध कराते थे। इसमें सभी बच्चों की ड्रेस का रंग एक समान रहता था, लेकिन अब अभिभावकों को खुद ड्रेस खरीदकर देनी होगी। अलग-अलग जगह से कपड़ा खरीदने या रेडीमेड ड्रेस खरीदने से ड्रेस के रंगों में असमानता यानी रंग हल्के या तेज हो सकते हैं।
डीबीटी व्यवस्था के तहत सरकार इस बार ड्रेस का पैसा सीधे बच्चे के अभिभावक के खाते में ट्रांसफर करेगी। इसके बाद अभिभावक स्वयं ड्रेस खरीदकर बच्चे को देंगे। शिक्षकों के माध्यम से बच्चों की डिटेल ली जा रही है, जिसे लखनऊ भेजा जाएगा। वहां से पैसा सीधे खातों में ट्रांसफर होगा।
- रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।