मिसवाक करने से नहीं टूटता है रोजा
हेल्पलाइन पर दिए रोजेदारों के सवालों के जवाब
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों की शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने अपने बंदों के लिए माह-ए-रमजान में बेपनहा बरकतें और रहमतें रखी हैं। रोजा भूख और प्यास को बर्दाश्त करने तथा सब्र व इंसानियत के जज्बे को समझने का पाठ पढ़ाता है।
सवाल - गाजियाबाद निवासी नदीम ने पूछा कि रोजे की हालत में मिसवाक (दातुन) तर लकड़ी से करनी चाहिए या खुश्क लकड़ी जरूरी है। क्या नीम की लकड़ी से भी मिसवाक कर सकते हैं। यदि मिसवाक का स्वाद मुंह में आ रहा है तो इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब- शरीयत के मुताबिक मिसवाक चाहे तर लकड़ी से हो या खुश्क लकड़ी या फिर नीम की लकड़ी से हो। हर तरह मिसवाक करना जायज है। अगर मिसवाक करने से मुंह में स्वाद आ गया, तब भी रोजा नहीं टूटेगा।
सवाल- नखासा बाजार निवासी रिफत ने पूछा कि क्या जकात के रूप में किसी बीमार रिश्तेदार का इलाज कराया जा सकता है।
जवाब- अगर रिश्तेदार जकात लेने के पात्र हो और उसको इलाज की जरूरत है तो उनको यह रकम दे दी जाए और उसका मालिक बना दिया जाए। फिर वह इस रकम से अपना इलाज करा लें, जब तक पात्र व्यक्ति को जकात की रकम का मालिक न बनाया जाए, तब तक जकात अदा नहीं होती।