उत्तर प्रदेश के देवबंद में राष्ट्रवादी मुस्लिम महिला संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज ने जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बयान पर कड़ा एतराज जताया है।
उन्होंने कहा कि लव मैरिज करना गलत नहीं है, लेकिन पहचान छिपाकर युवतियों का धर्मांतरण कराना गलत है। मौलाना मदनी लव जिहाद में शामिल लोगों की कानूनी मदद और पैरवी की बात कहकर मुस्लिमों को गुमराह न करें।
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जीपीओ रोड स्थित सभागार में पत्रकार वार्ता में फरहा फैज ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद, दारूल उलूम और पर्सनल लॉ बोर्ड जैसी कट्टरपंथी संस्थाएं मुस्लिमों को गुमराह कर रही हैं। यदि ये संस्थाएं अपने वजूद का असर दिखाना ही चाहती हैं तो मुस्लिम युवाओं को शिक्षित करने, रोजगार दिलाने और फैमिली एक्ट जैैसे प्रावधानों के लिए काम करें। ये संस्थाएं सही काम करतीं तो मुस्लिमों के माथे पर कट्टरवाद या आतंकवाद का टैग नहीं लगता।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिमों को पिछड़ा दिखाकर बाहरी मुल्कों से बड़े स्तर पर धन की उगाही की जा रही है। मुस्लिम समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। तीन तलाक कानून के मामले में भी इन संस्थाओं का रवैया सही नहीं था। पीड़ित महिलाओं का अपमान किया गया। उन पर हमले तक करवाए गए। इसलिए इन संस्थाओं को अपना नजरिया बदलना चाहिए।
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