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बागवानों पर लॉक डाउन और मौसम का असर

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छुटमलपुर के एक बाग में बीमारी से खराब होकर जमीन पर पड़ी आम की फसल - फोटो : SAHARANPUR
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छुटमलपुर (सहारनपुर)। लॉक डाउन और लगातार रंग बदल रहे मौसम ने आम उत्पादकों के चेहरे का रंग उड़ा दिया है। आम की फसल में बड़े पैमाने पर आई काली और सफेद फफूंदी, चेपा, कढ़ी कीड़ा की बीमारी ने क्षेत्र में आम की फसल पचास फीसदी तक खराब कर दी है। गेहूं और सब्जी में नुकसान उठा चुके किसानों को अब आम की फसल से भी राहत मिलती नहीं दिख रही है।
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सहारनपुर का बेहट तहसील क्षेत्र आम उत्पादन के चलते फल पट्टी क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है। यहां के आम की मांग दूसरे प्रदेशों के साथ ही विदेशों तक में है। यही वजह है कि गन्ने, गेहूं और सब्जी के बाद क्षेत्र के किसानों की आय का एक बड़ा स्रोत आम की फसल है। इस फसली सीजन में मौसम की मार के चलते गेहूं और सब्जी की फसल ने तो किसानों को रुलाया ही अब आम पर भी काली और सफेद फफूंदी, चेपा, कढ़ी कीड़ा, कैटर पीलर की मार पड़ रही है। इस बीमारी में आम काला पड़ जाता है। उसकी बढ़त नहीं होती और डंडी कमजोर होने से फल समय से पहले ही नीचे आ गिरता है। कैटर पीलर बीमारी में कीड़ा नई मोल के पत्तों को काट कर खत्म कर देता है। खेड़ी शिकोहपुर के नसीम अहमद, खुजनावर के दिलशाद अहमद, राव मुख्तियार, शेरपुर खानाजादपुर के उमेश कांबोज आदि बाग ठेकेदारों का कहना है कि इस साल लॉकडाउन के चलते समय से कीटनाशकों का स्प्रे नहीं किया जा सका। गंगाली के भूपेंद्र सिंह राणा, बेहड़ा संदल सिंह के शेर सिंह, भैंसराव के अनिल सिंह, जीवाला के सुभाष सिंह, खुजनावर के राव गुलाम वारिस, मामूवाला के नाथीराम सैनी आदि बाग मालिकों ने बताया कि दिन में मौसम का गर्म होना और रात को तापमान में गिरावट आम की फसल के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। इन आम उत्पादकों का कहना है कि इस साल फसल काफी अच्छी होने की उम्मीद थी, लेकिन बीमारियों के चलते चालीस से पचास फीसदी तक आम की फसल खराब हो गई है।

छुटमलपुर में आम के बाग पर लगी फसल में आया रोग- फोटो : SAHARANPUR

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