शाकंभरी। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में आई भीषण बाढ़ के बाद मंदिर प्रबंधन द्वारा 31 मई तक कपाट बंद रखने की घोषणा की गई है। इसके बावजूद शनिवार को मां शाकंभरी के दर्शन की आस लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिद्धपीठ पहुंचे। मंदिर के कपाट बंद देख उनके चेहरों पर मायूसी जरूर दिखी, लेकिन उनकी श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई। श्रद्धालुओं ने मां का स्मरण कर सड़क किनारे ही भंडारे लगाए।
बता दें, कि बृहस्पतिवार को सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी की खोल में आई बाढ़ में दो महिलाओं की मौत हो गई थी। कई श्रद्धालुओं के वाहन बह गए थे। भवन बंद होने पर भी कोई पैदल यात्रा कर पहुंचा था तो कोई परिवार सहित सैकड़ों किलोमीटर दूर से मां के दर्शन की अभिलाषा लेकर आया था। पूरे क्षेत्र में दिनभर जय मां शाकंभरी के जयकारे गूंजते रहे।
- शामली निवासी श्रद्धालु सविता ने बताया कि उनकी 11 सदस्यीय टोली तीन दिन पहले पैदल यात्रा पर निकली थी। शनिवार को जब वे सिद्धपीठ पहुंचे तो मंदिर बंद मिला। इसकी जानकारी नहीं थी। उनकी टोली वर्ष में दो बार पैदल चलकर मां शाकंभरी के दरबार में पहुंचती है। दर्शन नहीं होने का दुख जरूर है, लेकिन विश्वास है कि मां की इच्छा के बिना कुछ नहीं होता।
-भूरादेव से पहले गांव नागलमाफी के निकट सड़क किनारे भंडारा लगा रहे बड़ौत की आजाद नगर कॉलोनी निवासी श्रद्धालु विनोद और उनकी पत्नी शिमला ने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से लगातार मां के दरबार में भंडारा करते आ रहे हैं। इस बार पहली बार उन्हें मंदिर परिसर के बजाय सड़क किनारे भंडारा लगाना पड़ा।
-पानीपत निवासी मनोज कश्यप अपने पूरे परिवार के साथ मां के दर्शन के लिए पहुंचे थे। उनके साथ भाई रामू, दिनेश, बहन दीपा और अन्य परिजन भी थे। उन्होंने कहा कि मां के दर्शन की बड़ी इच्छा थी, लेकिन कपाट बंद होने के कारण दर्शन नहीं हो सके।
-गंगोह क्षेत्र के गांव डूभर किशनपुर निवासी वीरसेन ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने संकटमोचन हनुमान मंदिर पर भंडारा किया था। उस समय उन्होंने पुत्र की नौकरी लगने की मन्नत मांगी थी, जो मां भगवती और हनुमान जी की कृपा से पूरी हो गई। मंदिर क्षेत्र तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में उन्होंने खुले स्थान पर ही भंडारा लगाकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
सहजानंद महाराज ने की धैर्य बनाए रखने की अपील
शाकंभरी। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी स्थित शंकराचार्य आश्रम प्रभारी एवं अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भैरव तंत्राचार्य सहजानंद जी महाराज ने शनिवार को सिद्धपीठ क्षेत्र का पैदल भ्रमण कर बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। कई स्थानों पर अभी भी मलबा, पत्थर और गाद जमा होने से जनजीवन प्रभावित है। उन्होंने स्थानीय दुकानदारों,श्रद्धालुओं तथा आश्रमों के संचालकों से बातचीत कर नुकसान की जानकारी ली। महाराज ने कहा कि यह समय धैर्य और सेवा का है तथा सभी लोगों को मिलकर एक दूसरे की सहायता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते तब तक सभी श्रद्धालुओं को प्रशासन और मंदिर प्रबंधन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
बाढ़ के बाद बंद पड़ा सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी का मुख्य गेट। संवाद