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जीवांश कार्बन की कमी से बिगड रही मिटटी की सेहत

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मृदा स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण योजना के लिए नहीं मिला दो वर्ष से बजट
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। रसायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग और उचित फसल चक्र के अभाव में मृदा की सेहत बिगड़ रही है। लगातार दोहन करने से जनपद की मृदा में जीवांश कार्बन के साथ ही जिंक, फॉस्फोरस से लेकर पोटाश तक की कमी पाई जा रही है। इसका प्रभाव न सिर्फ फसल के उत्पादन पर पड़ रहा है, बल्कि फसल की लागत में भी इजाफा हो रहा है।
बढ़िया फसल के लिए भूमि में भरपूर पोषक तत्व होने चाहिए। लेकिन मृदा के अत्यधिक दोहन के चलते मृदा में जीवांश कार्बन से लेकर पोषक तत्वों की लगातार कमी आ रही है। मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के आंकड़ों के अनुसार मृदा का पीएच 6.5 से 8.5 होना चाहिए। मृदा परीक्षण में यह 7.43 आ रहा है। जीवांश कार्बन की मृदा में सामान्य मात्रा 0.80 प्रतिशत होनी चाहिए, जबकि यह 0.37 फीसदी तक ही पाई जा रही है। फॉस्फोरस की मात्रा 40 किलो प्रति हेक्टेयर की बजाए 18.5 किलो आ रही है। पोटाश प्रति हेक्टेयर 250 किलो होनी चाहिए। यह मात्रा 178 किलो तक ही पाई जा रही है। पोषक तत्वों की कमी का असर मृदा के स्वास्थ्य के साथ ही फसलों के उत्पादन पर भी पड़ता है।
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दो वर्ष से नहीं मिला बजट
मृदा सुदृढ़ीकरण योजना के तहत मृदा परीक्षण प्रयोगशाला को पिछले दो वर्षों से बजट नहीं मिला है। इस योजना के तहत सभी विकास खंड क्षेत्र में गांवों को चिह्नित कर मिट्टी के नमूनों की निशुल्क जांच कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जाते हैं। लेकिन बजट के अभाव में मृदा परीक्षण के काम आने वाला रसायन समाप्त हो रहा है। जिससे मिट्टी की जांच प्रभावित हो रही है।
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बजट जल्द आने की उम्मीद
जो किसान अपने खेत की मिट्टी का नमूना लेकर आता है, उससे 102 रुपये लेकर मिट्टी की जांच की जाती है। मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में रसायनों के लिए बजट की मांग को लेकर निदेशालय को पत्र भी लिखा गया है। बजट के जल्द मिलने की उम्मीद है। - पवन कुमार, सहायक निदेशक
ऐसे सुधारे मृदा की सेहत
- फसल चक्र अपनाएं, दलहनी फसल को जरूर शामिल करें।
- गोबर, कंपोस्ट और हरी खाद का नियमित प्रयोग करें।
- रसायनिक उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करें।
- फसल बुआई से पहले भूमि शोधन एवं मृदा परीक्षण अवश्य कराएं।
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