सहारनपुर। कोरोना के साथ ही ब्लैक फंगस नई चुनौती के रूप में सामने आया है। जनपद में भी अभी तक करीब आधा दर्जन संदिग्ध मामले समाने आ चुके हैं, जिनमें से कई को जांच और इलाज के लिए मेरठ रेफर किया गया है।
फंगस होने के कारणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सबसे बड़ी वजह गंदगी को माना जा रहा है। फिर वह गंदगी चाहे मास्क से जुड़ी हो या फिर ऑक्सीजन सिलिंडर पर लगे मास्क से। मगर इसके बाद भी अस्पतालों में मास्क आदि की सफाई को लेकर चौकसी नहीं है। ऑक्सीजन सिलिंडर और मरीज को ऑक्सीजन देते वक्त मरीज के मुंह पर लगाए जाने वाले प्लास्टिक की सफाई की पड़ताल की गई। एसबीडी जिला अस्पताल केे इमरजेंसी वार्ड में रखे ऑक्सीजन सिलिंडर गंदे थे, जिन पर ही कुछ मास्क लटके मिले। इमरजेंसी में तैनात डॉ. स्वामी ने बताया कि ऑक्सीजन देते समय मरीज को लगाए जाने वाले मास्क को पहले स्प्रिट से सैनिटाइज किया जाता है। उसके बाद ही मरीज को लगाया जाता है। इसके अलावा बिना मास्क के केवल पाइप के जरिए भी मरीज के नाक में ऑक्सीजन दी जा रही है, जिससे किसी तरह के फंगस के फैलने का खतरा नहीं है।
सैनिटाइज किए जाते हैं मास्क
राजकीय मेडिकल कॉलेज की सीएमएस डॉ. मोनिका शर्मा ने बताया कि ऑक्सीजन मास्क दो तरह के आते हैं। एक ऐसा होता है जो एक ही मरीज पर इस्तेमाल होता है, उसके बाद दूसरा बदलना होता है। एक ऐसा होता है, जो सैनिटाइज करने के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मास्क को स्प्रिट से सैनिटाइज करने के बाद ही मरीज को लगाया जाता है।
मास्क फंगस का कारण नहीं: केवी सिंह
एसबीडी जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. केवी सिंह का कहना है कि ऑक्सीजन सिलिंडर या ऑक्सीजन के लिए लगाए जाने वाले मास्क से फंगस होने का खतरा ना के बराबर होता है। उनका कहना है कि यदि ऑक्सीजन मास्क ब्लैक फंगस की वजह होता तो अभी तक पता नहीं कितनों को ये रोग हो गया होता।