डॉ. नवाज ने शायरी से दिया सद्भाव का संदेश
अधिवेशन में नामचीन शायर डॉ. नवाज देवबंदी ने अपने शायराना अंदाज में सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने मौलाना महमूद मदनी के नेतृत्व में जमीयत द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की और उनके आपसी भाईचारा बढ़ाने के संदेश को अपनी शायरी के जरिये आगे बढ़ाया।
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डॉ. नवाज ने शेर सुनाते हुए कहा... रोशनी का कुछ न कुछ इमकान होना चाहिए, बंद कमरे में भी रोशनदान होना चाहिए, हिंदू मुस्लिम कुछ भी लिखा हो माथे पर मगर, आपके सीने में हिंदुस्तान होना चाहिए। दूसरे शेर में उन्होंने कहा... मोहब्बत के चिरागों को जो आंधी से डराते हैं, उन्हें जाकर बता देना हम जुगनू बनाते हैं, ये दुनिया दो किनारों को कभी मिलने नहीं देती, चलो दोनों किसी दरिया पे पुल बनाते हैं।